
वाइब्रेंट विलेज और सीमा दर्शन से सीमांत क्षेत्र में लौटने लगी रौनक, 14,500 फीट की ऊंचाई पर आस्था और संस्कृति का संगम
संजय कुंवर, पार्वती कुंड/मलारी।
भारत-चीन सीमा से सटे चमोली के बड़ाहोती क्षेत्र में श्रावण मास के दौरान आस्था और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। समुद्र तल से करीब 14,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित पौराणिक पार्वती कुंड और शिव-पार्वती मंदिर में क्षेत्रीय श्रद्धालुओं ने पहुंचकर पूजा-अर्चना की। इस दौरान सीमांत क्षेत्र में दाकुड़ी, झुमैलो और झमाको के पारंपरिक लोकगीतों की गूंज सुनाई दी।

केंद्र सरकार की वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम और सीमा दर्शन जैसी पहलों के बाद नीति-माणा घाटी के सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन और तीर्थाटन को नई गति मिलने लगी है। पार्वती कुंड भी अब श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन रहा है। श्रावण मास में ज्योतिर्मठ विकासखंड के रेगड़ी क्षेत्र से श्रद्धालुओं का दल पार्वती कुंड पहुंचा और शिव-पार्वती मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया।
तीन गांवों के श्रद्धालु पहुंचे पार्वती कुंड
क्षेत्र पंचायत सदस्य रेगड़ी कमल किशोर के नेतृत्व में रेगड़ी, करछी और तुगासी गांवों से मातृशक्ति, बुजुर्ग, युवा और बच्चों का दल पार्वती कुंड पहुंचा। दल में शामिल नवयुवक मंगल दल रेगड़ी के अध्यक्ष नवीन चंद्र फरस्वाण ने बताया कि क्षेत्र के ग्रामीण हर वर्ष श्रावण मास में सीमांत धार्मिक स्थलों के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
उन्होंने कहा कि पार्वती कुंड की यात्रा आध्यात्मिक अनुभव के साथ सीमा दर्शन और सीमांत पर्यटन से जुड़ने का भी अवसर देती है। केंद्र सरकार की पहल से नीति-माणा घाटी के दुर्गम और सीमांत क्षेत्रों में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ी है।
लोक संस्कृति से जीवंत हुई घाटी
पार्वती कुंड की शांत और मनोरम वादियों में पारंपरिक परिधानों में सजे श्रद्धालुओं ने दाकुड़ी, झुमैलो और झमाको की प्रस्तुतियां दीं। लोकगीतों और नृत्यों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालु प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक वातावरण से अभिभूत नजर आए।
सीमा दर्शन से बढ़ी आवाजाही
नीति घाटी के देवताल और रिमखिम-बड़ाहोती के पास स्थित पार्वती कुंड तक आवाजाही सुगम होने से सीमांत पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है। सड़क और वाहन सुविधा बेहतर होने से अब पर्यटक और श्रद्धालु इन दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं। यात्रा के दौरान प्रशासन और आइटीबीपी की ओर से आवश्यक पहचान और स्वास्थ्य जांच की प्रक्रिया भी पूरी की जाती है।
स्थानीय लोगों को रोजगार की उम्मीद
सीमांत क्षेत्रों में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की बढ़ती आवाजाही से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है। होमस्टे, स्थानीय उत्पाद, खान-पान और परिवहन जैसी गतिविधियों को इससे लाभ मिल सकता है। बड़ाहोती-पार्वती कुंड में आस्था, संस्कृति और सीमा पर्यटन का यह मेल सीमांत गांवों में नई रौनक के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
