
विद्या भारती के विद्यालयों में सामूहिक गायन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां
लक्ष्मण नेगी
ऊखीमठ। राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विद्या भारती के तत्वावधान में सरस्वती शिशु मंदिर और सरस्वती विद्या मंदिरों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। विद्यार्थियों, आचार्यों और शिक्षकों ने सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ का गायन कर राष्ट्र के प्रति श्रद्धा और समर्पण व्यक्त किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके बाद विद्यार्थियों ने सामूहिक स्वर में ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया। राष्ट्रगीत के स्वरों से विद्यालय परिसर गूंज उठा। विद्यार्थियों ने देशभक्ति गीत, समूहगान, कविता पाठ और भारतीय संस्कृति व स्वतंत्रता संग्राम पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने ‘वंदे मातरम्’ के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह भारतीय स्वतंत्रता चेतना और राष्ट्रभक्ति की सशक्त अभिव्यक्ति रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इस गीत ने लोगों में मातृभूमि के प्रति समर्पण और एकजुटता की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मुख्य वक्ता शिक्षाविद भूपेंद्र राणा ने कहा कि युवा पीढ़ी को देश के इतिहास, संस्कृति और स्वतंत्रता आंदोलन के मूल्यों से जोड़ना आवश्यक है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम, अनुशासन और राष्ट्रीय एकता की भावना विकसित करने में सहायक हैं।
इस अवसर पर अधिवक्ता नागेंद्र राणा, जिला प्रचारक नितीन, लक्ष्मी प्रसाद भट्ट, प्रधान पुजारी बागेश लिंग, वेदपाठी विश्व मोहन जमलोकी, प्रधानाचार्य लक्ष्मण सिंह नेगी सहित आचार्य-आचार्या, अभिभावक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने राष्ट्रहित में कार्य करने का संकल्प लिया।
