ऊखीमठ : बुग्यालों में खिला ब्रह्म कमल, रंग-बिरंगे पुष्पों से सजी हिमालय की वादियां

Team PahadRaftar

बुग्यालों में खिला ब्रह्म कमल, रंग-बिरंगे पुष्पों से सजी हिमालय की वादियां

सावन में ब्रह्म कमल के खिलने से बढ़ी प्राकृतिक छटा, पुष्पों की विविधता ने बुग्यालों की सुंदरता में लगाए चार चांद

लक्ष्मण सिंह नेगी, ऊखीमठ

सावन माह के आगमन के साथ ही हिमालयी ऊंचाई वाले बुग्याल इन दिनों रंग-बिरंगे पुष्पों से गुलजार हो उठे हैं। मखमली हरी घास के बीच खिला ब्रह्म कमल और विभिन्न प्रजातियों के आकर्षक पुष्प यहां की प्राकृतिक सुंदरता को और निखार रहे हैं। दूर तक फैले बुग्यालों में बिखरी पुष्पों की रंगीन छटा प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों को सहज ही आकर्षित कर रही है।

मानसून के दौरान हिमालयी क्षेत्रों में नमी और अनुकूल मौसम मिलने से ऊंचाई वाले इलाकों में वनस्पतियां और पुष्प अपने पूरे यौवन पर पहुंचने लगते हैं। इन दिनों कहीं सफेद, कहीं पीले, गुलाबी और बैंगनी रंग के पुष्प हरी घास के बीच अपनी अलग छटा बिखेर रहे हैं। पुष्पों की विविधता ने हिमालयी बुग्यालों की सुंदरता में चार चांद लगा दिए हैं।

सावन में ब्रह्म कमल का विशेष महत्व

हिमालयी क्षेत्र में पाया जाने वाला ब्रह्म कमल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है। सावन माह भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। ऐसे में ब्रह्म कमल के खिलने का समय श्रद्धालुओं के लिए भी विशेष आकर्षण का विषय रहता है। हिमालयी लोकमान्यताओं में इसे भगवान शिव से जोड़ा जाता है।

बुग्यालों में ब्रह्म कमल के साथ अन्य हिमालयी पुष्पों के खिलने से वनस्पतियों की अनुपम छटा देखने को मिल रही है। विशिष्ट बनावट और सुंदरता के कारण ब्रह्म कमल प्रकृति प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

मखमली घास पर बिखरे पुष्प कर रहे आकर्षित

हिमालयी बुग्याल अपनी मखमली घास, शांत वातावरण और मनोरम दृश्यों के लिए प्रसिद्ध हैं। मानसून में जब चारों ओर हरियाली छा जाती है और इसी हरियाली के बीच तरह-तरह के पुष्प खिलते हैं तो बुग्याल किसी प्राकृतिक चित्रकारी जैसे नजर आते हैं। सुबह ओस की बूंदों से नहाए पुष्पों पर पड़ने वाली सूर्य की किरणें इनके सौंदर्य को और निखार देती हैं।

बादलों की आवाजाही, ठंडी हवाओं और दूर दिखाई देती हिमालयी चोटियों के बीच पुष्पों से सजे बुग्याल प्रकृति प्रेमियों को रोमांचित कर रहे हैं। शिक्षाविद रविंद्र भट्ट के अनुसार सावन के दौरान बुग्यालों की प्राकृतिक सुंदरता अपने चरम पर पहुंच जाती है।

पर्यटन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी अहम

हिमालयी बुग्याल प्राकृतिक सौंदर्य के साथ ही स्थानीय पर्यटन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। गर्मियों और मानसून के दौरान पर्यटक, ट्रैकर और प्रकृति प्रेमी इन क्षेत्रों का रुख करते हैं। पुष्पों से सजे बुग्याल पर्यटकों के आकर्षण को और बढ़ा रहे हैं।

प्रकृति प्रेमी शंकर सिंह पंवार का कहना है कि पर्यावरणीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए बुग्यालों में पर्यटन को बढ़ावा दिया जाए तो स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। साथ ही हिमालयी जैव विविधता के संरक्षण को प्राथमिकता देना जरूरी है।

संरक्षण पर देना होगा जोर

प्रकृति विशेषज्ञों के अनुसार बुग्याल हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के महत्वपूर्ण अंग हैं। यहां पाई जाने वाली वनस्पतियां और पुष्प जैव विविधता की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में पर्यटकों और स्थानीय लोगों को इनकी प्राकृतिक संपदा के संरक्षण के प्रति सजग रहना होगा।

बुग्यालों में पुष्प तोड़ने, प्लास्टिक कचरा फैलाने और वनस्पतियों को नुकसान पहुंचाने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाना जरूरी है। प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखकर ही आने वाली पीढ़ियों को हिमालय की यह अनुपम सुंदरता सौंपी जा सकती है।

सावन में ब्रह्म कमल और अन्य हिमालयी पुष्पों से सजे बुग्याल इन दिनों प्रकृति का अद्भुत रूप प्रस्तुत कर रहे हैं। हरियाली के बीच खिले पुष्प हिमालय की खूबसूरती में नया रंग भर रहे हैं।

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