
पहाड़ रफ्तार
पीपलकोटी। पहाड़ की बेटियां अब केवल सपने नहीं देख रहीं, बल्कि उन्हें अपने दम पर साकार भी कर रही हैं। दशोली विकासखंड के गडोरा गांव की अंजलि उनियाल ने संघर्ष को अपनी ताकत बनाकर आत्मनिर्भरता की ऐसी मिसाल पेश की है, जो क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। पीपलकोटी में संचालित आस्था ऊन शॉप में वह सिलाई के जरिए हर महीने 15 से 20 हजार रुपये की आय अर्जित कर अपने परिवार की आर्थिक मजबूती में योगदान दे रही हैं।

करीब दस वर्षों तक अंजलि ऊन और बुनाई का कार्य करती रहीं, लेकिन इसमें अपेक्षित आमदनी नहीं होने पर उन्होंने वर्ष 2023-24 में सिलाई का काम शुरू करने का फैसला किया। शुरुआत में उन्होंने एक सिलाई मास्टर रखा और उसके साथ स्वयं भी सिलाई सीखने लगीं। सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन तीन महीने बाद सिलाई मास्टर अचानक काम छोड़कर चला गया। ग्राहकों के कपड़े समय पर तैयार करने की जिम्मेदारी और काम अधूरा रह जाने की चिंता उनके सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़ी हो गई।
अंजलि ने हार मानने के बजाय

संघर्ष का रास्ता चुना। वह पीपलकोटी से करीब 30 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय गोपेश्वर पहुंचीं और दोगुनी फीस देकर एक माह का विशेष सिलाई प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्होंने ग्राहकों से थोड़ा समय मांगा और सभी के कपड़े स्वयं सिलकर तय समय पर सौंप दिए। इस कठिन दौर में ग्राहकों ने भी उन पर भरोसा बनाए रखा और पूरा सहयोग किया।
आज अंजलि प्रतिदिन चार से पांच सूट तैयार करती हैं। मेहनत, गुणवत्ता और समय पर काम पूरा करने की आदत ने उन्हें क्षेत्र में अलग पहचान दिलाई है। बीए तक शिक्षित अंजलि का ग्राहक वर्ग लगातार बढ़ रहा है और उनकी दुकान स्थानीय महिलाओं की पसंद बन चुकी है।
अंजलि का कहना है कि आत्मनिर्भर बनने के लिए सबसे जरूरी आत्मविश्वास और मेहनत है। यदि सीखने की इच्छा हो तो कोई भी कठिनाई सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती। उनका मानना है कि पहाड़ की महिलाएं हुनर को पहचानें और छोटे-छोटे स्वरोजगार से जुड़कर आर्थिक रूप से मजबूत बनें।

अंजलि उनियाल की कहानी बताती है कि मजबूत इरादों के सामने हालात ज्यादा देर तक टिक नहीं पाते। सिलाई मशीन से शुरू हुआ उनका यह सफर आज आत्मनिर्भरता की ऐसी प्रेरक कहानी बन चुका है, जो कई महिलाओं को आगे बढ़ने का हौसला दे रहा है।

