ज्योतिर्मठ, संवाददाता। चीड़ की सूखी पत्तियों (पिरूल) को रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तीकरण से जोड़ने वाली “पिरूल वुमेन” को गौरा देवी पर्यावरण, प्रकृति एवं पर्यटन विकास मेले में गौरा देवी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मिलेट वैली उर्गम घाटी में आयोजित मेले के दूसरे दिन उन्हें यह सम्मान पिरूल आधारित हस्तशिल्प को नई पहचान दिलाने और हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रदान किया गया।

अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट विकासखंड के हाट गांव निवासी मंजू शाह ने पहाड़ों के जंगलों में बड़ी मात्रा में मिलने वाले पिरूल को आजीविका का साधन बनाकर नई मिसाल कायम की है। वर्तमान में राजकीय इंटर कॉलेज ताड़ीखेत में प्रयोगशाला सहायक के पद पर कार्यरत मंजू शाह अपनी अनूठी हस्तशिल्प कला के कारण पूरे देश में पहचान बना चुकी हैं।
मंजू शाह पिछले 16 वर्षों से पिरूल से विभिन्न उत्पाद तैयार कर रही हैं। अब तक वह 10 हजार से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ चुकी हैं। उनके मार्गदर्शन में महिलाएं टोकरी, पूजा थाल, फूलदान, डोरमैट, पेन स्टैंड, टी-कोस्टर, डाइनिंग मैट, पर्स, टोपी, आभूषण और अन्य सजावटी उत्पाद तैयार कर रही हैं।
पिरूल की राखियों ने बनाई अलग पहचान
मंजू शाह ने पिरूल से आकर्षक राखियां तैयार कर एक नया प्रयोग किया। रक्षाबंधन के दौरान इन राखियों की बाजार और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अच्छी मांग रही। वह पिछले पांच वर्षों से प्रदेश के विभिन्न जिलों में महिलाओं को पिरूल राखी बनाने का प्रशिक्षण भी दे रही हैं, जिससे अनेक महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं।
वनाग्नि की समस्या से समाधान तक का सफर
उत्तराखंड के जंगलों में बड़ी मात्रा में मिलने वाला पिरूल वनाग्नि की प्रमुख वजह माना जाता है। हर वर्ष लाखों टन पिरूल जंगलों में गिरता है, जिससे आग की घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। मंजू शाह ने इसी पिरूल को उपयोगी उत्पादों में बदलकर पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का कार्य किया है।
कई पुरस्कारों से हो चुकी हैं सम्मानित
मंजू शाह को उनकी अभिनव पहल के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कई सम्मान मिल चुके हैं। वर्ष 2019 में उन्हें इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में बेस्ट अपकमिंग आर्टिस्ट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। वह उत्तराखंड के साथ ही अन्य राज्यों की महिलाओं को भी प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भरता की राह दिखा रही हैं।
गौरा देवी पुरस्कार मिलने पर मंजू शाह ने कहा कि यह सम्मान उन सभी महिलाओं के प्रयासों का सम्मान है, जो पिरूल को रोजगार का माध्यम बनाकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ना है।

