
ज्योतिर्मठ, संजय कुंवर संवाददाता। उर्गमघाटी में जनदेश सामाजिक संगठन के तत्वावधान में आयोजित 29वें गौरा देवी पर्यावरण एवं प्रकृति पर्यटन विकास मेले के दूसरे दिन पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और हिमालयी विकास के मुद्दे केंद्र में रहे। वक्ताओं ने कहा कि जलवायु असंतुलन, बढ़ता तापमान, वनाग्नि और प्लास्टिक प्रदूषण हिमालय के लिए गंभीर चुनौती बन चुके हैं, जिनसे निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत है।
कार्यक्रम के दूसरे दिन का शुभारंभ आज उर्गम वार्ड की जिला पंचायत सदस्य मनोरमा देवी, ज्योतिर्मठ नगर पालिका अध्यक्ष देवेश्वरी शाह तथा क्षेत्र प्रमुख अनूप नेगी ने दीप प्रज्वलित कर किया। मेले में 25 से अधिक महिला मंगल दलों ने लोक संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी रंगारंग प्रस्तुतियां देकर दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी।
मेले में पारंपरिक खाद्य व्यंजन प्रदर्शनी के साथ विभिन्न विभागों द्वारा विकास और कृषि संबंधी प्रदर्शनियां भी लगाई गईं। किसानों को उन्नत बीज, खाद तथा जैविक दवाइयों की जानकारी दी गई। तीर्थाटन और पर्यटन विकास के साथ जलवायु संतुलन आधारित विकास मॉडल पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
वक्ताओं ने कहा कि असमय वर्षा, सूखा और जंगलों में बढ़ती आग की घटनाओं के कारण खेती-किसानी प्रभावित हो रही है। वन्यजीवों और मानव जीवन पर भी खाद्य संकट का खतरा बढ़ रहा है। बढ़ते तापमान के कारण हिमालयी ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। ऐसे में चौड़ी पत्ती वाले मिश्रित जंगलों को बढ़ावा देने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
शंकर सिंह बिष्ट और मंजू शाह हुए सम्मानित
मेले में वर्ष 2026 का गौरा देवी सम्मान को पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए प्रदान किया गया। वहीं पिरूल को रोजगार और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने वाली “पिरूल वुमेन” को भी सम्मानित किया गया।
मेले के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा
क्षेत्र प्रमुख अनूप नेगी ने कहा कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखते हुए विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने मेले के लिए एक लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा की। वहीं जिला पंचायत उपाध्यक्ष ने गौरा देवी पर्यावरण मेले के स्थायी पंडाल निर्माण के लिए पांच लाख रुपये देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष तक पंडाल निर्माण का कार्य पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।
मेले में पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण विकास और हिमालयी संस्कृति के संरक्षण को लेकर लोगों ने सामूहिक संकल्प भी लिया।
