संजय कुंवर गोविंदघाट/हेमकुंड साहिब
करीब 15 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित विश्व प्रसिद्ध सिख तीर्थ श्री हेमकुंड साहिब की कठिन यात्रा, जहां युवा श्रद्धालुओं की भी परीक्षा लेती है, वहीं 99 वर्षीय माता हरवंत कौर ने अपनी अटूट श्रद्धा और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर इस चुनौतीपूर्ण यात्रा को सफलतापूर्वक पूरा कर सभी को प्रेरित कर दिया।

टाटा नगर से अपने जत्थे के साथ यात्रा पर पहुंचीं माता हरवंत कौर ने दुर्गम लोकपाल घाटी के पैदल मार्ग को पार करते हुए श्री हेमकुंड साहिब में मत्था टेका और दर्शन करने के बाद सकुशल अपने साथियों के साथ गोविंदघाट लौट आईं। उनकी इस यात्रा ने श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को भावुक कर दिया।
श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के वरिष्ठ प्रबंधक सरदार सेवा सिंह ने बताया कि यह माता हरवंत कौर की दसवीं हेमकुंड साहिब यात्रा है। उनका जन्म वर्ष 1926 में हुआ था। उन्होंने बताया कि माता जी के पति आजादी से पहले पटियाला महाराजा की प्रसिद्ध पोलो टीम के खिलाड़ी रहे थे। स्वयं माता हरवंत कौर ने भी स्वतंत्रता से पूर्व आठवीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की थी।
सेवा सिंह ने कहा कि 99 वर्ष की आयु में भी माता हरवंत कौर पूरी तरह स्वस्थ हैं। उनकी आंखों की रोशनी और स्मरण शक्ति आज भी बेहतर है। उन्होंने इसे गुरु महाराज की असीम कृपा बताते हुए कहा कि माता जी की अटूट आस्था सभी श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
हेमकुंड साहिब यात्रा मार्ग पर माता हरवंत कौर का उत्साह और साहस श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बना रहा। उनकी यह यात्रा इस बात का संदेश देती है कि सच्ची श्रद्धा, दृढ़ संकल्प और सकारात्मक सोच के सामने उम्र भी बाधा नहीं बनती।
