
मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़ देशसेवा का फैसला, गया में प्रशिक्षण पूरा कर भारतीय सेना में बनीं अधिकारी; पिता बोले—बेटी की वर्दी सबसे बड़ा गर्व
केएस असवाल
गौचर : एक तरफ करीब 20 लाख रुपये सालाना का आकर्षक पैकेज, दूसरी तरफ देश की वर्दी पहनकर सेवा करने का सपना। आज के दौर में जब युवा बेहतर पैकेज और सुविधाओं वाली नौकरी को प्राथमिकता देते हैं, वहीं चमोली के पहाड़ की बेटी आस्था नेगी ने एक अलग रास्ता चुना। उन्होंने मल्टीनेशनल कंपनी का अवसर छोड़ भारतीय सेना में जाने का फैसला किया और अब लेफ्टिनेंट ऑफिसर बनकर देशसेवा की राह पर आगे बढ़ रही हैं।

गौचर क्षेत्र के करछुना गांव की आस्था ने गया, बिहार में अपना प्रशिक्षण पूरा किया। प्रशिक्षण के बाद भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट ऑफिसर बनने की खबर गांव पहुंची तो परिवार से लेकर ग्रामीणों तक खुशी की लहर दौड़ गई। बधाई देने वालों का तांता लग गया।
आर्मी स्कूल से शुरू हुआ सफर
आस्था की पढ़ाई आर्मी स्कूल देहरादून से हुई। बचपन से ही सेना के अनुशासन और देशसेवा के प्रति उनका रुझान रहा। पढ़ाई के साथ लक्ष्य को लेकर उनकी गंभीरता ने उन्हें धीरे-धीरे उस मुकाम तक पहुंचाया, जहां आज वह भारतीय सेना की अधिकारी के रूप में खड़ी हैं।
उनकी कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि सेना में अधिकारी बनने का फैसला उन्होंने सिर्फ नौकरी के तौर पर नहीं, बल्कि देशसेवा के संकल्प के रूप में लिया।
20 लाख का पैकेज भी नहीं डिगा सका फैसला
आज युवाओं के लिए निजी क्षेत्र में अच्छा पैकेज करियर की बड़ी उपलब्धि माना जाता है। आस्था के सामने भी करीब 20 लाख रुपये के पैकेज का विकल्प था। लेकिन उन्होंने आर्थिक आकर्षण से ऊपर देशसेवा को रखा।
आस्था के पिता महेन्द्र सिंह नेगी बताते हैं कि बेटी ने मल्टीनेशनल कंपनी का अवसर छोड़ सेना में जाने का निर्णय लिया तो परिवार ने उसके फैसले का समर्थन किया। उनके लिए बेटी का यह निर्णय गर्व का विषय है।
महेन्द्र सिंह नेगी स्वयं भारतीय वायु सेना में सेवा दे चुके हैं। सेवानिवृत्ति के बाद वह वर्तमान में चौरासैंण इंटर कॉलेज में प्रवक्ता के पद पर कार्यरत हैं। बेटी के सेना में अधिकारी बनने पर उन्होंने उसे आशीर्वाद दिया।
पिता बोले—बेटी की वर्दी से बड़ा कोई पैकेज नहीं
महेन्द्र सिंह नेगी कहते हैं, “आस्था ने अपनी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया है। उसके सामने करीब 20 लाख रुपये के पैकेज का अवसर था, लेकिन उसने देश की सेवा को चुना। एक पिता के लिए इससे बड़ी खुशी और गर्व की बात क्या हो सकती है कि उसकी बेटी देश की रक्षा और सेवा के लिए आगे बढ़े। मेरा आशीर्वाद है कि वह पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपने कर्तव्य का निर्वहन करे।”
आस्था की मां अनीता नेगी गृहणी हैं। बेटी की सफलता से पूरा परिवार उत्साहित है। मां के लिए बेटी की यह उपलब्धि वर्षों की मेहनत और सपनों का परिणाम है।
पहाड़ की बेटियों के लिए बनीं मिसाल
आस्था की सफलता सिर्फ उनके परिवार की उपलब्धि नहीं है। यह उस पहाड़ की बेटी की कहानी है, जहां सीमित संसाधनों के बावजूद युवा अपने सपनों को पंख देते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आस्था ने सेना में अधिकारी बनकर करछुना गांव के साथ पूरे चमोली जिले का गौरव बढ़ाया है।
क्षेत्रवासियों के मुताबिक आस्था की उपलब्धि खास तौर पर उन बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो सेना और देशसेवा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का सपना देखती हैं।
सफलता के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ी
लेफ्टिनेंट बनना आस्था के लिए मंजिल नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। अब उनके कंधों पर भारतीय सेना की वर्दी के साथ जिम्मेदारियां भी हैं। परिवार और क्षेत्र को उम्मीद है कि वह अपनी प्रतिभा, अनुशासन और समर्पण के बल पर सेना में बेहतर सेवाएं देंगी।
करछुना की इस बेटी ने अपने फैसले से एक संदेश भी दिया है—करियर सिर्फ बड़े पैकेज का नाम नहीं, कभी-कभी असली सफलता उस रास्ते को चुनने में होती है, जिस पर चलकर देश की सेवा की जा सके।

