भग्यूंल गांव बना पर्यावरण संरक्षण की मिसाल, ग्रामीणों ने जल-जंगल-जमीन बचाने का लिया संकल्प
विश्व जल दिवस पर सामूहिक जागरूकता की अनोखी पहल, वन पंचायत सशक्त करने को तैयार हुआ माइक्रो प्लान
संजय कुंवर
ज्योतिर्मठ : विश्व जल दिवस के अवसर पर ज्योतिर्मठ ब्लॉक के भग्यूंल गांव में पर्यावरण संरक्षण को लेकर ग्रामीणों की सजगता और जागरूकता देखने को मिली। जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के लिए गांव में आयोजित बैठक ने यह साफ कर दिया कि अब ग्रामीण अपने प्राकृतिक संसाधनों को बचाने के लिए खुद आगे आ रहे हैं।

नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क, जोशीमठ और जनदेश संगठन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस बैठक में ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और वन पंचायत को मजबूत बनाने के साथ-साथ पंचवर्षीय सूक्ष्म नियोजन (माइक्रो प्लान) तैयार किया। इस योजना में जल संरक्षण, नमी संरक्षण और सघन वन विकसित करने जैसे अहम बिंदुओं को शामिल किया गया।
बैठक के दौरान यह बात प्रमुखता से सामने आई कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं, बल्कि इसके लिए जनसहभागिता जरूरी है। इसी सोच के साथ ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से जल स्रोतों के संरक्षण, वन क्षेत्र को सघन बनाने और पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने का संकल्प लिया।
वन पंचायत सरपंच मोहन सिंह रावत ने सघन वृक्षारोपण, वन अग्नि से सुरक्षा और जंगली जानवरों से फसल बचाने के उपायों पर जोर दिया। वहीं, सचिव प्रेम सिंह ने जनआधारित कार्यक्रमों को पर्यावरण संरक्षण की कुंजी बताया।
जनदेश संगठन के प्रतिनिधियों ने भी ग्रामीणों को जागरूक करते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ-साथ मानव संसाधन विकास भी जरूरी है। नियमित प्रशिक्षण और बैठकों के माध्यम से ग्रामीणों को आत्मनिर्भर और जागरूक बनाया जा सकता है।
ग्रामीणों ने ट्रैकिंग मार्ग, होमस्टे, नर्सरी और चारा विकास जैसी योजनाओं को भी पर्यावरण के अनुकूल आजीविका के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा।
इस मौके पर महिला मंगल दल और क्षेत्र पंचायत प्रतिनिधियों समेत बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि भग्यूंल गांव अब पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक मॉडल गांव बनने की ओर अग्रसर है।

