
लक्ष्मण नेगी ऊखीमठ। काली एवं सरस्वती नदियों के पावन संगम तथा उत्तर गया के नाम से विख्यात रुच्छ महादेव मंदिर में चल रही महाशिव पुराण कथा के नौवें दिन भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह निकाली गई भव्य जल कलश यात्रा में सैकड़ों महिला-पुरुष श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पारंपरिक वेशभूषा में श्रद्धालु सिर पर जल कलश लेकर ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयघोष करते हुए कथा स्थल तक पहुंचे। महिलाओं के मंगल गीत और भजन-कीर्तन से पूरा क्षेत्र शिवमय हो उठा।
व्यासपीठ से हरिद्वार के प्रख्यात कथावाचक संजय कृष्ण शास्त्री ने भगवान शिव की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि शिव महापुराण केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सत्य, सेवा, संयम और सदाचार का मार्ग दिखाने वाला दिव्य ग्रंथ है। उन्होंने कहा कि निष्काम भाव से भगवान शिव की आराधना करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती हैं।
कथावाचक ने मां गंगा की महिमा का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं से नदियों की स्वच्छता बनाए रखने और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान भी किया। उन्होंने कहा कि गंगा भारतीय संस्कृति और आस्था की जीवनदायिनी धारा है।
इस अवसर पर उत्तराखंड सरकार में राज्य मंत्री चंडी प्रसाद भट्ट ने कथा में पहुंचकर व्यासपीठ का आशीर्वाद लिया तथा भगवान रुच्छ महादेव और मां कोटि माहेश्वरी के दर्शन किए। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक समरसता को सशक्त बनाने का कार्य करते हैं। उन्होंने नई पीढ़ी को अपनी धार्मिक परंपराओं से जोड़ने का भी आह्वान किया।
आयोजन समिति के विपिन शास्त्री ने बताया कि कथा स्थल पर दिनभर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। कालीमठ घाटी सहित दूर-दराज के गांवों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक कथा श्रवण किया। प्रधान कालीमठ प्रदीप राणा ने कहा कि महाशिव पुराण कथा से लोगों को आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा मिल रही है।
इस दौरान आचार्य सूरज उनियाल, अमित कोठारी, विजय बहुगुणा, प्रेम प्रकाश भट्ट, आयुष भट्ट, अजय भट्ट, पुरुषोत्तम भट्ट, प्रधान त्यूडी सुभाष रावत, देवेंद्र राणा, दिनेश सत्कारी, अमर सिंह धिरवाण, उदय सेमवाल समेत कालीमठ घाटी के विभिन्न गांवों के श्रद्धालु और महिला मंगल दल त्यूडी की महिलाएं मौजूद रहीं।
