लगातार वर्षा से जनजीवन प्रभावित, भूस्खलन का खतरा बढ़ा, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तापमान गिरा
लक्ष्मण नेगी ऊखीमठ। केदार घाटी में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से जनजीवन प्रभावित हो गया है। मंदाकिनी नदी समेत घाटी की सभी सहायक नदियां और गदेरे उफान पर हैं। नदी किनारे रहने वाले लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं, जबकि संवेदनशील क्षेत्रों में भूस्खलन और भूधंसाव का खतरा भी गहरा गया है।

नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ने से आपदा प्रभावित क्षेत्रों में रह रहे परिवारों की चिंता और बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार बारिश के चलते भूस्खलन और भूधंसाव की आशंका बनी हुई है, जिससे हर समय भय का माहौल बना हुआ है।
भारी बारिश का असर कृषि, बागवानी और स्थानीय कारोबार पर भी पड़ने लगा है। कई स्थानों पर खेतों में जलभराव की स्थिति बन गई है, जबकि सब्जी उत्पादकों और पशुपालकों को भी नुकसान की आशंका सता रही है। खराब मौसम के कारण केदारनाथ, मद्महेश्वर और तुंगनाथ धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी कमी आई है, जिससे पर्यटन और तीर्थाटन पर निर्भर स्थानीय कारोबार प्रभावित होने लगा है।
प्रशासन ने आपदा प्रबंधन, पुलिस, राजस्व और लोक निर्माण विभाग की टीमों को अलर्ट मोड पर रखा है। संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राहत एवं बचाव दल तैयार हैं। लोगों से मौसम विभाग की सलाह का पालन करने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की गई है।
उनियाणा की प्रधान बिशाम्बरी देवी ने कहा कि मानसून के दौरान मद्महेश्वर घाटी के संवेदनशील क्षेत्रों में स्थायी सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने नदी तटों के संरक्षण, भूस्खलन संभावित स्थलों के उपचार और प्रभावी पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करने पर जोर देते हुए कहा कि इससे भविष्य में जन-धन की हानि को काफी हद तक कम किया जा सकता है। फिलहाल घाटी में बारिश का दौर जारी है और लोग मौसम के सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं।

