
ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर उठाए सवाल, पीडब्ल्यूडी पर धन के दुरुपयोग का लगाया आरोप
लक्ष्मण नेगी ऊखीमठ। विकासखंड ऊखीमठ के चौमासी-खाम-रैकाधार पैदल मार्ग के विस्तारीकरण एवं रखरखाव कार्य पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद मार्ग की स्थिति दयनीय बनी हुई है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए लोक निर्माण विभाग पर सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि मार्ग के किलोमीटर तीन से 11 तक विस्तारीकरण और सुदृढ़ीकरण का कार्य कराया गया था, लेकिन अधिकांश स्थानों पर सुरक्षा दीवारें क्षतिग्रस्त हैं और कई हिस्सों में पैदल मार्ग टूटकर संकरा हो गया है। बरसात के दौरान भूस्खलन और बोल्डर गिरने का खतरा बना रहता है, जिससे राहगीरों की जान जोखिम में पड़ जाती है। उनका आरोप है कि निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं हुआ, जिसके चलते करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद मार्ग की हालत नहीं सुधरी।
ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2013 की केदारघाटी आपदा और 31 अगस्त 2024 की आपदा के दौरान यही पैदल मार्ग सैकड़ों ग्रामीणों और यात्रियों के लिए सुरक्षित निकासी का माध्यम बना था। ऐसे महत्वपूर्ण मार्ग की अनदेखी भविष्य में किसी भी आपदा के दौरान गंभीर संकट खड़ा कर सकती है।
ग्राम पंचायत चौमासी के पूर्व प्रधान मुलायम सिंह तिंदोरी ने कहा कि मानसून शुरू होते ही मार्ग की स्थिति और अधिक खतरनाक हो गई है। कई स्थानों पर दरारें पड़ गई हैं और मलबा आने से पैदल आवाजाही भी मुश्किल हो गई है। उन्होंने जिला प्रशासन से मार्ग का उच्च स्तरीय निरीक्षण, सामाजिक एवं तकनीकी ऑडिट कराने तथा दोषी अधिकारियों और संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही गुणवत्ता मानकों के अनुरूप मार्ग के पुनर्निर्माण की भी मांग उठाई है।
उन्होंने कहा कि सरकार पर्वतीय क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे के विकास पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन यदि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं होगी तो सरकारी योजनाओं का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकेगा।
