पौड़ी : छह माह बाद संपन्न हुआ ऐतिहासिक मोरी मेला, परंपराओं के निर्वहन के साथ दी गई देवताओं को विदाई

Team PahadRaftar

जसपाल नेगी पौड़ी। गगवाड़स्यूं घाटी के तमलाग और कोट ब्लॉक के कुंडी गांव में छह माह से चल रहा ऐतिहासिक मोरी मेला सोमवार को धार्मिक अनुष्ठानों और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हो गया। हर 12 वर्ष में आयोजित होने वाले इस मेले के समापन पर विभिन्न धार्मिक रस्मों का निर्वहन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

लोक मान्यता के अनुसार, अज्ञातवास के दौरान पांडव इस क्षेत्र में आए थे। तभी से यहां पांडवों को देवस्वरूप मानकर पूजा-अर्चना की जाती है। मेले के दौरान तमलाग गांव स्थित भैरव मंदिर प्रांगण में छह माह तक प्रतिदिन ढोल-सागर की थाप पर पांडवों के पश्वा नृत्य का आयोजन किया गया। इस दौरान क्षेत्र के लोग पारंपरिक वेशभूषा में धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होते रहे।

मेले का शुभारंभ माता कुंती और कालिदास को विधिवत मंदिर में आमंत्रित कर मंडाण लगाने की परंपरा के साथ होता है। समापन के अवसर पर श्रद्धालुओं ने देवप्रयाग तक पैदल यात्रा की। इसके अलावा गेंडी वध (प्रतीकात्मक राक्षस वध), जंगल से पवित्र वृक्ष लाने तथा अन्य पारंपरिक अनुष्ठानों का भी विधि-विधान से आयोजन किया गया।

समापन समारोह में तमलाग, कुंडी और आसपास के गांवों के अलावा दूर-दराज से भी श्रद्धालु पहुंचे। पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति और सदियों पुरानी परंपराओं का संगम देखने को मिला। मेले के समापन के साथ ही छह माह से चल रही धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी विधिवत समापन हो गया।

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