सोशल मीडिया पर वायरल आरोपों से मचा हड़कंप, अध्यक्ष बोले- दोषी कोई भी हो, नहीं बख्शा जाएगा
संजय कुंवर
देहरादून/श्री बदरीनाथ धाम। उत्तराखंड की सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक संस्थाओं में शामिल श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) को उस समय सफाई देनी पड़ी, जब सोशल मीडिया पर श्री बदरीनाथ धाम में चढ़ावे और दान राशि के कथित दुरुपयोग के आरोप तेजी से वायरल होने लगे। आरोपों के तूल पकड़ने के बाद बीकेटीसी ने पूरे मामले की आंतरिक जांच के आदेश दे दिए हैं। समिति का कहना है कि यदि जांच में कोई भी कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने साफ किया कि सोशल मीडिया पर जिस कर्मचारी को उनका “निजी सचिव” बताया जा रहा है, वह उनका निजी सचिव नहीं, बल्कि मंदिर समिति का नियमित सरकारी कर्मचारी है। उन्होंने कहा कि संबंधित कर्मचारी पूर्व में भी समिति के तीन अध्यक्षों के साथ वैयक्तिक सहायक के रूप में कार्य कर चुका है। ऐसे में तथ्यों की जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा, लेकिन यदि आरोप सही साबित होते हैं तो दोषियों को किसी भी कीमत पर नहीं बख्शा जाएगा।
मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल शिकायत के बाद बदरीनाथ मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई गई। हालांकि उपलब्ध फुटेज से पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है और विस्तृत जांच के लिए आंतरिक जांच समिति गठित की जा रही है।
समिति का कहना है कि जांच रिपोर्ट उपलब्ध साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर तैयार होगी। यदि किसी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता सामने आती है तो श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति अधिनियम, 1939 तथा कर्मचारी आचरण नियमावली के तहत कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
आस्था से जुड़ा मामला, इसलिए संयम की अपील
बीकेटीसी ने इसे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा संवेदनशील विषय बताते हुए लोगों से अपील की है कि जांच पूरी होने से पहले अपुष्ट और भ्रामक सूचनाओं के प्रसार से बचें। समिति का कहना है कि तथ्यों के आधार पर ही कार्रवाई होगी और पारदर्शिता के साथ पूरे प्रकरण का निस्तारण किया जाएगा।
