गोपेश्वर : चमोली में छह स्थानों पर ‘आपदा’, सिस्टम हुआ एक्टिव, राहत-बचाव का हुआ अभ्यास

Team PahadRaftar

चमोली में छह स्थानों पर ‘आपदा’, सिस्टम हुआ एक्टिव, राहत-बचाव का हुआ अभ्यास

चमोली। मानसून के दौरान संभावित आपदाओं से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए गुरुवार को जनपद में राज्य स्तरीय मानसून तैयारी मॉक अभ्यास-2026 आयोजित किया गया। इस दौरान जिले के छह स्थानों पर भूस्खलन, बादल फटने, पुल क्षतिग्रस्त होने और सुरंग में श्रमिकों के फंसने जैसी काल्पनिक घटनाओं का परिदृश्य तैयार कर राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया।

उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) के निर्देशन में आयोजित मॉक ड्रिल के तहत ज्योतिर्मठ के लामबगड़ में भारी बारिश से मलबा आने, पुल क्षतिग्रस्त होने और अलकनंदा नदी का बहाव आंशिक रूप से बाधित होने की स्थिति बनाई गई। चैपड़ो में भूस्खलन से भवनों में मलबा भरने, गौचर के कमेड़ क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग पर पत्थर गिरने से यातायात बाधित होने और वाहनों के फंसने का अभ्यास कराया गया।

इसके अलावा थराली, देवाल और वाण क्षेत्र में बादल फटने, ज्योतिर्मठ के तमक नाला में पुल क्षतिग्रस्त होने से संपर्क मार्ग बाधित होने तथा पीपलकोटी स्थित टीएचडीसी सुरंग में क्षति के कारण श्रमिकों के फंसने की काल्पनिक सूचना पर भी राहत एवं बचाव कार्य संचालित किए गए।

घटनाओं की सूचना मिलते ही जिला आपदा परिचालन केंद्र में इंसिडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम (आईआरएस) सक्रिय कर दिया गया। पुलिस, एसडीआरएफ, राजस्व, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई, स्वास्थ्य, अग्निशमन और पेयजल विभाग की टीमें तत्काल घटनास्थलों के लिए रवाना हुईं। सभी स्थानों पर स्टेजिंग एरिया बनाकर राहत एवं बचाव कार्य का अभ्यास किया गया।

प्रशासन के अनुसार मॉक ड्रिल का उद्देश्य मानसून के दौरान संभावित आपदाओं में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया और राहत-बचाव तंत्र की प्रभावशीलता का परीक्षण करना था, ताकि वास्तविक आपदा की स्थिति में कम से कम समय में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

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