भगवान शिव के दिव्य चरित्र का किया गुणगान, भजनों और शिव महानाम संकीर्तन से शिवमय हुआ वातावरण
संजय कुंवर ज्योतिर्मठ (चमोली)। चातुर्मास्य व्रत एवं साधना के तहत आयोजित शिवपुराण कथा के पांचवें दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा स्थल पर दिनभर भक्ति और आस्था का माहौल बना रहा। भजनों और शिव महानाम संकीर्तन से पूरा वातावरण शिवमय हो गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर भगवान शिव की आराधना की।
कथा व्यास विजय सेमवाल ने भगवान शिव के दिव्य अवतारों, उनके मंगलमय चरित्र और शिव भक्ति के गूढ़ रहस्यों का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की शरण में आने से साधक के कायिक, वाचिक और मानसिक पापों का नाश होता है। शिव की भक्ति मनुष्य को सद्मार्ग पर ले जाती है और जीवन में आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है।
कथा के उपरांत स्वामी प्रत्यक्चैतन्यमुकुन्दानन्द गिरि महाराज ने श्रद्धालुओं को आशीर्वचन दिए। उन्होंने कहा कि निष्काम भाव से की गई शिव पूजा ही वास्तविक भक्ति है। जब मनुष्य बिना किसी स्वार्थ के भगवान शिव की आराधना करता है तो उसका मन निर्मल होता है और वह सांसारिक बंधनों से ऊपर उठकर आध्यात्मिक शांति की ओर अग्रसर होता है।
इस अवसर पर ज्योतिर्मठ के व्यवस्थापक विष्णुप्रियानन्द ब्रह्मचारी, कुशलानन्द बहुगुणा, महिमानन्द उनियाल, जगदीश उनियाल, नगर पालिका अध्यक्ष देवेश्वरी शाह, रोहिणी रावत, आरती उनियाल, सरिता उनियाल सहित सैकड़ों श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। कथा के समापन पर भव्य आरती उतारी गई और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।

