कुरुड में विराजमान हुई बंड नंदा की डोली, किरूली में बंड भूमियाल और गेदाणु देवता की छंतोलियों ने संभाला अपना स्थान; नंदा की बड़ी जात का विधिवत समापन
पहाड़ रफ्तार
चमोली /पीपलकोटी। हिमालय की अधिष्ठात्री मां नंदा की बड़ी जात यात्रा के समापन के साथ बंड क्षेत्र की देव डोलियां और छंतोलियां मंगलवार को अपने धाम लौट आईं। कुरुड से पांच सितंबर को शुरू हुई करीब पखवाड़ेभर की इस कठिन यात्रा में शामिल बंड नंदा की डोली कुरुड में विराजमान हो गई, जबकि बंड भूमियाल और गेदाणु देवता की छंतोलियां किरूली स्थित अपने-अपने मंदिरों में पहुंच गईं।

मंगलवार सुबह करीब 11 बजे बंड भूमियाल मंदिर, कोंटा-किरूली में ग्रामीणों, बंड मंदिर समिति और बंड विकास संगठन की ओर से देव डोलियों, छंतोलियों और बड़ी जात में शामिल श्रद्धालुओं का फूल-मालाओं से भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद मंदिर में पूजा-अर्चना और हवन हुआ। देवताओं के पश्वाओं ने श्रद्धालुओं को आशीष वचन दिए और मां नंदा के प्रसाद स्वरूप ब्रह्मकमल वितरित किया गया।
बंड मंदिर समिति के संरक्षक शंभू प्रसाद सती ने बताया कि वह वर्ष 1987, 2000 और 2014 के बाद इस बार चौथी बार बड़ी जात यात्रा में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि इस बार श्रद्धालुओं की भारी संख्या के बावजूद यात्रा में मां नंदा की कृपा बनी रही। रूपकुंड और ज्यूरागौली से हिमालय के अद्भुत दर्शन श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय रहे।
वहीं, वर्ष 2014 के बाद दूसरी बार बड़ी जात में शामिल हुए गेदाणु देवता के पश्वा जगत सिंह नेगी ने कहा कि कठिन और विषम परिस्थितियों के बावजूद होमकुंड पहुंचकर मां नंदा को कैलाश के लिए विदा करने का सौभाग्य मिला।
यात्रा में बंड भूमियाल के पश्वा नरेंद्र सिंह खाती, गेदाणु देवता के पश्वा जगत सिंह नेगी, समिति संरक्षक शंभू प्रसाद सती, अध्यक्ष जगत सिंह नेगी, महामंत्री रघुनाथ सिंह फर्स्वाण और 68 वर्षीय पान सिंह पंवार समेत बंड क्षेत्र के सैकड़ों युवा और बुजुर्ग शामिल रहे। मंदिर में पूजा-अर्चना, हवन और प्रसाद वितरण के साथ यात्रा का समापन किया गया। इस दौरान पूर्व अध्यक्ष अतुल शाह, हरीश पुरोहित, राजेंद्र सिंह फर्स्वाण, भुवन लाल शाह, गंगा सिंह रावत और महावीर रावत समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
चट्टान की तरह अडिग रहे कर्नल हरेंद्र रावत
मां नंदा की बड़ी जात यात्रा को सफल बनाने में सेवानिवृत्त कर्नल हरेंद्र सिंह रावत की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। उन्होंने कुरुड से होमकुंड तक यात्रा को सुचारु रूप से संचालित कराने के लिए लगातार व्यवस्थाओं और यात्रियों के साथ समन्वय किया। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच वह पूरी यात्रा के दौरान मजबूती से डटे रहे। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भागीदारी के बीच यात्रा का सफल संचालन सामुदायिक सहयोग की ताकत को भी सामने लाया।
कनोल में पूजा नेगी के नेतृत्व में सामुदायिक सहभागिता की मिसाल
नंदानगर ब्लॉक के दुर्गम कनोल गांव में ग्राम प्रधान पूजा नेगी के नेतृत्व में ग्रामीणों ने बड़ी जात में पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए सामुदायिक स्तर पर व्यवस्थाएं कीं। ग्रामीणों के सहयोग से दो दिन तक बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के रहने और भोजन-पानी की व्यवस्था की गई। दुर्गम क्षेत्र में सीमित संसाधनों के बावजूद ग्रामीणों की सामूहिक भागीदारी ने बड़ी जात में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण सहारा दिया।
चार पड़ावों पर मिली निश्शुल्क स्वास्थ्य सेवा
स्वामी विवेकानंद धर्मार्थ चिकित्सालय, पीपलकोटी की ओर से बड़ी जात यात्रा के दौरान कनोल, वाण, वेदनी बुग्याल और पातर नौचैनिया में श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। चिकित्सा शिविरों में आवश्यक दवाइयों के साथ ऑक्सीजन की सुविधा भी उपलब्ध रही। दुर्गम हिमालयी मार्ग पर स्वास्थ्य टीम की मौजूदगी ने श्रद्धालुओं को आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में भूमिका निभाई।
