
केएस असवाल गौचर। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) गौचर में आयोजित दो दिवसीय आनंदम पाठ्यचर्या अभिमुखीकरण कार्यशाला का समापन हो गया। कार्यशाला में जिले के प्राथमिक विद्यालयों के 45 नवनियुक्त शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। इस दौरान शिक्षकों को बच्चों के सामाजिक एवं भावनात्मक विकास के साथ भयमुक्त वातावरण में शिक्षण के तौर-तरीकों की जानकारी दी गई।
समापन अवसर पर डायट के प्राचार्य आकाश सारस्वत ने कहा कि आनंदम पाठ्यचर्या का उद्देश्य विद्यालय में बच्चों के लिए ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां वे बिना किसी भय के सीख सकें। उन्होंने कहा कि बच्चे का मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक रूप से विद्यालय से जुड़ा रहना जरूरी है। इसी उद्देश्य से आनंदम पाठ्यचर्या संचालित की जा रही है।
कार्यक्रम समन्वयक डॉ. कमलेश कुमार मिश्र ने बताया कि कार्यशाला में माइंडफुल चेकिंग के साथ आनंदम के चार प्रमुख तत्व माइंडफुलनेस, कहानी, गतिविधि और अभिव्यक्ति के बारे में शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया। शिक्षकों को आनंदम की समय-सारिणी और पाठ्यचर्या के विभिन्न पहलुओं को विस्तार से समझाया गया।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष पीएमश्री विद्यालयों में कक्षा नौ से 12वीं तक भी आनंदम कार्यक्रम संचालित किया जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों के सामाजिक एवं भावनात्मक स्तर को और मजबूत करना है।
90 नवनियुक्त शिक्षकों का हुआ अभिमुखीकरण
डॉ. मिश्र ने बताया कि जिले में अब तक गैरसैंण के 18, नंदानगर के 14, नारायणबगड़ के 14, थराली के 12, जोशीमठ के नौ, देवाल के आठ तथा पोखरी, दशोली और कर्णप्रयाग के पांच-पांच नवनियुक्त शिक्षकों सहित कुल 90 शिक्षकों का आनंदम पाठ्यचर्या के लिए अभिमुखीकरण किया जा चुका है। इसके अलावा डीएलएड के 35 प्रशिक्षुओं को भी प्रशिक्षण दिया गया है।
समापन सत्र में डायट के वरिष्ठ संकाय सदस्य राजेंद्र प्रसाद मैखुरी, वीरेंद्र सिंह कठैत, रविंद्र सिंह बर्त्वाल, बच्चन जितेला, नीतू सूद, सुमन भट्ट, डॉ. गजपाल राज, सुबोध कुमार डिमरी और लभ्य फाउंडेशन के अमर पाटिल मौजूद रहे। संचालन डॉ. कमलेश कुमार मिश्र ने किया।
