रिचार्ज होने लगा सरोवर, फिर दिखने लगे देशी-विदेशी परिंदे
संजय कुंवर, बदरीनाथ धाम
भू-बैकुंठ नगरी श्री बदरीनाथ धाम के बीचोंबीच स्थित प्राकृतिक बदरीश झील के दिन अब बहुरने लगे हैं। लंबे समय से कम जलस्तर और गाद की समस्या से जूझ रही झील के संरक्षण को लेकर पीएमओ के संज्ञान के बाद कार्यदायी संस्था ने कवायद तेज कर दी है। झील की साफ-सफाई और रिचार्ज का काम शुरू होने के बाद यहां फिर से देशी-विदेशी परिंदों की चहचहाहट सुनाई देने लगी है।

कभी बदरीनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही बदरीश झील पिछले कुछ समय से बदहाल स्थिति में थी। मानसून के बावजूद झील में पर्याप्त पानी नहीं पहुंच रहा था। वहीं, गाद और कीचड़ जमा होने से इसका प्राकृतिक स्वरूप भी प्रभावित हो रहा था। स्थिति यह थी कि झील पर आने वाले परिंदों ने भी यहां से दूरी बना ली थी।
सफाई के साथ रिचार्ज का काम तेज
पीएमओ के संज्ञान के बाद अब झील को पुराने स्वरूप में लौटाने की दिशा में कार्य शुरू हुआ है। जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश की एक संस्था की ओर से झील की साफ-सफाई के साथ इसे रिचार्ज करने का कार्य किया जा रहा है। झील से गाद और कीचड़ हटाए जाने के साथ जलस्तर में भी सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं।
स्थानीय होटल कारोबारी राम नारायण भंडारी ने बताया कि झील की सफाई शुरू होने के बाद स्थिति में बदलाव नजर आने लगा है। लंबे समय बाद देशी-विदेशी परिंदे फिर झील की ओर लौटने लगे हैं। इससे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में भी उत्साह है।
मास्टर प्लान के कार्यों पर भी नजर
प्रशासन अब झील में पानी कम होने के मूल कारणों की भी पड़ताल कर रहा है। प्राकृतिक जलस्रोतों की स्थिति की जांच की जा रही है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि बदरीनाथ मास्टर प्लान के तहत चल रहे निर्माण कार्यों के कारण कहीं झील के प्राकृतिक जलस्रोत प्रभावित तो नहीं हुए हैं।
प्राकृतिक जलस्रोतों की वास्तविक स्थिति सामने आने के बाद ही झील में पानी कम होने के कारणों की तस्वीर साफ हो सकेगी। फिलहाल झील की सफाई और रिचार्ज का काम तेजी से जारी है। पीएमओ के संज्ञान के बाद बदरीनाथ की इस प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण को लेकर प्रशासन की सक्रियता से स्थानीय लोगों को उम्मीद बंधी है कि बदरीश झील फिर अपने पुराने स्वरूप में लौटेगी।
