ऊखीमठ : सारी गांव में विधि-विधान से हुई ग्वाल देवता की पूजा, बच्चों और ग्रामीणों में दिखा उत्साह

Team PahadRaftar

लक्ष्मण नेगी ऊखीमठ। प्रकृति की सुरम्य वादियों और सीढ़ीनुमा खेत-खलिहानों के बीच बसे पर्यटन गांव सारी में श्रावण मास के अवसर पर सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार ग्वाल देवता (ग्वाल-बालों के देवता) की पूजा विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। पूजा में बच्चों, युवाओं, महिलाओं और ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया तथा पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल रहा।

परंपरा के अनुसार श्रद्धालुओं ने अपने-अपने घरों से दूध, दही, घी, मक्खन, रोट और विभिन्न व्यंजनों की भोग सामग्री मंदिर में लाकर ग्वाल देवता को अर्पित की। इसके बाद सभी ने प्रसाद का आपस में वितरण कर ग्रहण किया और गांव में पशुधन की वृद्धि, दूध-दही-घी की समृद्धि तथा विश्व कल्याण की कामना की।

इस पूजा की विशेषता सामाजिक एकता और आपसी सहयोग की भावना है। जिन परिवारों के घरों में दूध, दही, घी या मक्खन उपलब्ध नहीं होता, उनके पड़ोसी पूजा से पहले ही यह सामग्री उनके घर पहुंचा देते हैं, ताकि कोई भी परिवार इस सामूहिक धार्मिक आयोजन से वंचित न रहे।

पूजा के साथ ही गांव के चारागाह के एक हिस्से को पशुओं के चरान-चुगान और घास कटान के लिए अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया जाता है। यह प्रतिबंध दीपावली के शुभ अवसर पर समाप्त किया जाता है, जिसके बाद चारागाह फिर से पशुओं के लिए खोल दिया जाता है।

मंदिर के पुजारी चैत सिंह भट्ट ने बताया कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और गांव के सभी सार्वजनिक कार्यक्रम आपसी सहयोग व सामूहिक भागीदारी से संपन्न होते हैं। ग्राम प्रधान अनीता देवी ने कहा कि ग्वाल देवता पूजन ग्रामीणों में आपसी सौहार्द और भाईचारे को मजबूत करता है। क्षेत्र पंचायत सदस्य भरत सिंह नेगी ने इसे पर्यटन गांव सारी की प्राचीन सांस्कृतिक पहचान बताया, जबकि सरपंच देवेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि इस आयोजन से नई पीढ़ी अपनी लोक संस्कृति और विरासत से जुड़ती है। उन्होंने बताया कि हर वर्ष श्रावण मास में निर्धारित तिथि पर ग्वाल देवता की पूजा आयोजित की जाती है, जिससे अधिक से अधिक बच्चे इस परंपरा में सहभागी बन सकें। पूजा में बड़ी संख्या में बच्चे, युवक-युवतियां, महिलाएं और धियाणियां मौजूद रहीं।

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