बंड पट्टी से मां नंदा के साथ भूमियाल और गेंदाणु देवता की छंतोलियां भी कैलाश रवाना, ध्याणियां फफककर रो पड़ीं
पहाड़ रफ्तार गोपेश्वर। मां नंदा की बड़ी जात यात्रा के दौरान इन दिनों पूरा नंदा का मायका भक्ति और आस्था के रंग में डूबा हुआ है। बीते एक सप्ताह से अपने मायके के गांवों में प्रवास कर रही मां नंदा की डोलियां अब धीरे-धीरे अपने अगले पड़ावों की ओर बढ़ रही हैं। भादों की धूप, चारों ओर पसरी हरियाली और खेतों में पकती फसलों के बीच मां नंदा की डोली के पहुंचने से गांव-गांव में भव्य और दिव्य लोकोत्सव का दृश्य नजर आ रहा है। पड़ावों पर मां नंदा के जयकारों से वातावरण गूंज रहा है।

शुक्रवार को बंड, बधाण और दशोली-कुरुड़ क्षेत्र की नंदा डोलियां अपने-अपने रात्रि पड़ावों पर पहुंचीं। बंड क्षेत्र की नंदा डोली गौणा गांव, बधाण की नंदा डोली चेपड़ो और दशोली-कुरुड़ की नंदा डोली ल्वाणी गांव पहुंची।
लोकगीतों और जागरों के बीच मां नंदा को दी विदाई
बंड क्षेत्र की नंदा डोली को शुक्रवार को भूमियाल मंदिर कोंटा-किरूली से सैकड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में अगले पड़ाव गौणा के लिए विदा किया गया। इस दौरान बंड भूमियाल और गेंदाणु देवता की छंतोलियां भी मां नंदा के साथ कैलाश के लिए रवाना हुईं।

मां नंदा की विदाई के दौरान ग्रामीणों और ध्याणियों ने पारंपरिक लोकगीत और जागर गाकर अपनी ध्याणी को कैलाश के लिए विदा किया। महिलाओं ने भावुक होकर गाया
“मेरी मैत की धियाणी, तेरू बाटू हेरदू रोली,
हेरि चे जा, फेरी चे जा, तु मैत कु मुल्क।
जा मेरी गौरा जा, तू शिव का कैलाश,
जा मेरी गौरा तू, चौखम्भा उकाली…”
इन मार्मिक लोकगीतों के बीच कई ध्याणियों की आंखें छलछला उठीं। मां नंदा की डोली को विदा करते समय महिलाएं और ध्याणियां फफककर रो पड़ीं। माहौल ऐसा था कि श्रद्धा, प्रेम और विरह की भावनाएं एक साथ उमड़ पड़ीं।
समौण में अर्पित किए खाजा-चूड़ा और ककड़ी-मुंगरी
विदाई के दौरान श्रद्धालुओं ने अपने साथ लाए खाजा-चूड़ा, बिंदी, चूड़ी, ककड़ी और मुंगरी समेत विभिन्न पारंपरिक सामग्री मां नंदा को समौण के रूप में अर्पित की। इसके बाद मां नंदा की डोली को जयकारों के साथ अगले पड़ाव के लिए रवाना किया गया।

तीनों डोलियां पहुंचीं अगले पड़ाव
बंड की नंदा डोली भूमियाल मंदिर कोंटा-किरूली से पंछूला, भौंंधार और भनाई होते हुए गौणा पहुंची। वहीं बधाण की नंदा डोली सूना से राड़ीबगड़ और थराली होते हुए चेपड़ो पहुंची। दशोली-कुरुड़ की नंदा डोली सेमा से भौंंधार और चरबंग होते हुए ल्वाणी पहुंची। तीनों स्थानों पर ग्रामीणों ने मां नंदा का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ स्वागत किया।

इस अवसर पर बंड नंदा डोली की विदाई में पुजारी अशोक गौड़, भूमियाल मंदिर के पुजारी नरेंद्र खाती, गेंदाणु भगवान के पुजारी जगत सिंह नेगी, बंड मंदिर समिति के अध्यक्ष जगत सिंह नेगी, सचिव रघुनाथ सिंह फर्स्वाण, संरक्षक शंभू प्रसाद सती, पूर्व अध्यक्ष अतुल शाह, पूर्व ज्येष्ठ प्रमुख अयोध्या प्रसाद हटवाल, राजेंद्र सिंह फर्स्वाण, प्रदीप फर्स्वाण, संतोष फर्स्वाण, मुकेश फर्स्वाण, पंकज फर्स्वाण और लक्ष्मण सिंह चौहान समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
