
शौचालय व पेयजल संकट गहराया, बुग्यालों पर बढ़ता दबाव बना खतरा
लक्ष्मण नेगी
ऊखीमठ। चोपता से तक जाने वाले प्रसिद्ध पैदल मार्ग पर इन दिनों अव्यवस्थाओं का अंबार लगा है। चारधाम यात्रा सीजन के बीच बड़ी संख्या में पहुंच रहे तीर्थयात्रियों को बुनियादी सुविधाओं के अभाव में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

मार्ग पर शौचालय और प्रतिक्षालयों की समुचित व्यवस्था न होने से श्रद्धालुओं को खुले में शौच के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इससे न केवल यात्रियों को असुविधा हो रही है, बल्कि स्वच्छता व्यवस्था भी चरमराती नजर आ रही है।
इसके साथ ही पेयजल संकट भी गहराने लगा है। कई स्थानों पर प्राकृतिक जल स्रोत सूखने की कगार पर हैं, जिससे यात्रियों को पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बढ़ती भीड़ और जल स्रोतों के संरक्षण की अनदेखी से समस्या दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है।
वहीं चोपता–तुंगनाथ–चंद्रशिला ट्रैक के आसपास फैले बुग्यालों पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है। अनियंत्रित आवाजाही और कूड़ा-कचरे से इन संवेदनशील घास के मैदानों का अस्तित्व खतरे में पड़ रहा है। पर्यावरण प्रेमी चन्द्र सिंह नेगी ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो बुग्यालों को स्थायी नुकसान हो सकता है।
स्थानीय ग्रामीणों और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों ने प्रशासन से जल्द शौचालय, प्रतिक्षालय और पेयजल की व्यवस्था करने की मांग की है। अनिल जिरवाण का कहना है कि समस्याओं का समाधान न होने पर तीर्थयात्रियों की आस्था और क्षेत्र की प्राकृतिक धरोहर दोनों पर संकट गहरा सकता है।
इधर, केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग के गुप्तकाशी रेंज अधिकारी विमल कुमार भट्ट ने बताया कि बुग्यालों के संरक्षण के लिए विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है। प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश करने वाले 40 पर्यटकों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत जुर्माना वसूला गया है।

