ऊखीमठ : 70 साल बाद भी सड़क से कटा स्यासू, पीठ पर ढो रहे जिंदगी

Team PahadRaftar

70 साल बाद भी सड़क से कटा स्यासू, पीठ पर ढो रहे जिंदगी

लक्ष्मण नेगी 

ऊखीमठ। विकास के दावों के बीच कालीमठ घाटी का स्यासू गांव आज भी सड़क सुविधा से वंचित है। आजादी के सात दशक बाद भी गांव तक सड़क नहीं पहुंची, जिससे ग्रामीणों का जीवन बेहद कठिन बना हुआ है।

यहां के लोग आज भी राशन, गैस सिलेंडर और निर्माण सामग्री कई किलोमीटर दूर से पीठ पर ढोकर लाने को मजबूर हैं। सड़क के अभाव का सबसे ज्यादा असर बीमार, बुजुर्गों और महिलाओं पर पड़ रहा है। आपात स्थिति में मरीज को अस्पताल पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं होता।

पूर्व प्रधान राकेश रावत बताते हैं कि हर जरूरत का सामान खुद ढोना पड़ता है, जिससे समय और मेहनत के साथ आर्थिक बोझ भी बढ़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शासन-प्रशासन से सड़क निर्माण की मांग की गई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला।

ग्रामीण पंकज सिंह रावत का कहना है कि यदि जल्द सड़क नहीं बनी तो गांव से पलायन और बढ़ेगा। वहीं शिव सिंह रावत और प्रताप सिंह रावत का कहना है कि रोजगार और सुविधाओं के अभाव में लोग गांव छोड़ने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द सड़क निर्माण शुरू नहीं हुआ तो वे आंदोलन को बाध्य होंगे। उनका कहना है कि अब सिर्फ वादों से काम नहीं चलेगा, जमीन पर काम चाहिए।

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