देहरादून : देहरादून में हिमालयी विकास पर मंथन, ‘इकोलॉजी फर्स्ट’ की पैरवी

Team PahadRaftar

सतत निवेश और जलवायु चुनौतियों पर विशेषज्ञों की चर्चा, अनियंत्रित विकास पर जताई चिंता

देहरादून, 24 अप्रैल : हिमालयी क्षेत्र में सतत विकास और निवेश को लेकर शुक्रवार को देहरादून में उच्च स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें नीति-निर्माताओं, पर्यावरण विशेषज्ञों और करीब 50 हितधारकों ने जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों और उनके समाधान पर मंथन किया।

“समृद्ध हिमालयी भविष्य को सुरक्षित करना” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने साफ कहा कि विकास की दौड़ में पर्यावरण से समझौता भविष्य के लिए घातक साबित होगा।

कार्यक्रम में इंटीग्रेटेड माउंटेन इनिशिएटिव (IMI) और सस्टेनेबल डेवलपमेंट फोरम उत्तराखंड के प्रतिनिधियों ने हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते दबाव और नीतिगत खामियों की ओर ध्यान खींचा। IMI के अध्यक्ष रमेश नेगी ने कहा कि जब तक योजनाओं में प्रकृति को केंद्र में नहीं रखा जाएगा, तब तक कोई भी निवेश टिकाऊ नहीं हो सकता। उन्होंने “इकोलॉजी फर्स्ट, इकॉनमी लेटर” का मंत्र अपनाने पर जोर दिया।

विशेषज्ञों ने चेताया कि ‘थर्ड पोल’ कहे जाने वाले हिमालय पर जलवायु परिवर्तन और अनियंत्रित विकास का दबाव तेजी से बढ़ रहा है। इसके बावजूद नीति और संसाधन आवंटन में इस क्षेत्र को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं मिल रही है।

कार्यशाला में हिमाचल प्रदेश में सेब उत्पादन क्षेत्रों के बदलते स्वरूप, बादल फटने और भूस्खलन की बढ़ती घटनाएं, उत्तराखंड में जैव विविधता में गिरावट और तीर्थ मार्गों पर अनियंत्रित निर्माण को प्रमुख चिंता के रूप में उठाया गया। प्लास्टिक कचरे और भारी मशीनों के बढ़ते उपयोग को भी गंभीर खतरा बताया गया।

विशेषज्ञों ने वन क्षेत्रों में खाद्य स्रोतों की कमी के चलते बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष पर भी चिंता जताई और समय रहते ठोस कदम उठाने की जरूरत बताई।

राजपुर रोड स्थित होटल इंद्रलोक में आयोजित इस कार्यशाला में विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में ग्रीन निवेश ढांचे, क्षेत्रीय चुनौतियों और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा की गई।

आयोजकों का कहना है कि इस तरह के संवाद हिमालयी क्षेत्र के सतत विकास के लिए दीर्घकालिक रोडमैप तैयार करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

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