चमोली : हिमालय का नंदन कानन फिर गुलजार, फूलों की घाटी में लौटी रंगों की दुनिया

Team PahadRaftar

हिमालय का नंदन कानन फिर गुलजार, फूलों की घाटी में लौटी रंगों की दुनिया

विश्व धरोहर स्थल के द्वार खुले, 500 से अधिक पुष्प प्रजातियों के बीच शुरू हुआ नया पर्यटन सत्र

संजय कुंवर

हिमालय की ऊंची चोटियों के बीच जब सुबह की पहली किरणें बर्फ से ढकी चोटियों को सुनहरी आभा में बदल रही थीं, ठीक उसी समय प्रकृति के सबसे खूबसूरत अध्याय – फूलों की घाटी – ने एक बार फिर अपने द्वार खोल दिए। यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान में एक जून की सुबह ठीक आठ बजे विधिवत पूजा-अर्चना के साथ नए पर्यटन सत्र की शुरुआत हुई।

इसके साथ ही हिमालय का यह ‘नंदन कानन’ अगले पांच महीनों के लिए देश-दुनिया के प्रकृति प्रेमियों, ट्रेकर्स और शोधकर्ताओं के स्वागत को तैयार हो गया है।

द्वार खुलते ही पर्यटकों का पहला दल घाटी की ओर रवाना हुआ, जहां पार्क प्रशासन ने पारंपरिक रूप से मिष्ठान वितरण कर उनका स्वागत किया। इस अवसर पर वन विभाग, ईको विकास समिति, गढ़वाल मंडल विकास निगम, वन पंचायत, होटल एसोसिएशन घांघरिया और स्थानीय प्रशासन के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

जहां प्रकृति खुद रंगों से कहानी लिखती है

समुद्र तल से लगभग 12,995 फीट की ऊंचाई पर 87.5 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली फूलों की घाटी को यूं ही विश्व धरोहर नहीं कहा जाता। यहां 500 से अधिक पुष्प प्रजातियां मानसून के साथ रंगों की ऐसी दुनिया रचती हैं, जहां धरती लाल, नीली, पीली और बैंगनी आभा में नहा उठती है।

सीजन की शुरुआत में ही घाटी के मध्य भाग में हिमखंडों के बीच 20 से अधिक प्रजातियों के एल्पाइन फूलों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी है। आने वाले दिनों में यह घाटी अपने चरम सौंदर्य पर होगी, जब हजारों पुष्प एक साथ खिलकर इसे जीवंत कैनवास में बदल देंगे।

रेंज अधिकारी चेतना कांडपाल का बयान

फूलों की घाटी रेंज अधिकारी चेतना कांडपाल ने बताया कि
“विश्व धरोहर फूलों की घाटी को आज विधिवत पूजा-अर्चना के साथ प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। घाटी में पर्यटकों की सुविधा, सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। प्रवेश से पहले पर्यटकों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं, ताकि वे घाटी की जैव विविधता और प्राकृतिक सौंदर्य को बिना किसी क्षति के देख सकें।”

प्रवेंद्र सिंह चौहान (ईको विकास समिति अध्यक्ष)

ईको विकास समिति भ्यूंडार के अध्यक्ष प्रवेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि
“पर्यटक ट्रेकिंग के दौरान प्लास्टिक कचरा न फैलाएं और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें। हर आगंतुक को अपने साथ लाया गया कचरा वापस ले जाना चाहिए, ताकि फूलों की घाटी की जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन सुरक्षित रह सके। यह घाटी केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि प्रकृति की अनमोल धरोहर है।”

विवेक पंवार (एडवेंचर एसोसिएशन एंड वेलफेयर सोसाइटी)

एडवेंचर एसोसिएशन एंड वेलफेयर सोसाइटी चमोली के अध्यक्ष विवेक पंवार ने कहा कि
“वैली ऑफ फ्लावर्स नेशनल पार्क की सैर पर आने वाले सभी प्रकृति प्रेमियों और ट्रेकर्स को शुभकामनाएं हैं। यह घाटी हर आगंतुक के लिए अविस्मरणीय अनुभव है। सभी पर्यटक ट्रेक के दौरान पर्यावरण संरक्षण का ध्यान रखें, प्लास्टिक का उपयोग न करें और जैव विविधता को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचाएं।”

संजय सिंह चौहान (होटल कारोबारी, भ्यूंडार घाटी)

घांघरिया घाटी के होटल कारोबारी संजय सिंह चौहान ने बताया कि
“वैली ऑफ फ्लावर्स के कपाट खुलने के साथ ही देश-विदेश से पर्यटक दलों की बुकिंग आने लगी है, जिससे पर्यटन कारोबार में तेजी आने की उम्मीद है। खासकर मिड जुलाई से मिड अगस्त का फ्लॉवरिंग सीजन ट्रैकिंग ग्रुप्स के लिए सबसे आकर्षक समय होता है, जब घाटी में अच्छी आमदनी होती है।”

स्थानीय अर्थव्यवस्था में नई रफ्तार

घाटी खुलने के साथ ही घांघरिया, पुलना और भ्यूंडार क्षेत्र में होटल, गाइड, पोर्टर और घोड़ा-खच्चर व्यवसाय से जुड़े लोगों के चेहरे खिल उठे हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि फूलों की घाटी न सिर्फ पर्यटन का केंद्र है, बल्कि पहाड़ की आजीविका की मजबूत रीढ़ भी बन चुकी है।

500+ पुष्प प्रजातियों का जीवंत संसार

यह घाटी केवल फूलों का दृश्य नहीं, बल्कि हिमालयी जैव विविधता का अनमोल संग्रहालय है। यहां हिमालयी कस्तूरी मृग, भरल, काला भालू और कई दुर्लभ पक्षियों का प्राकृतिक आवास भी है, जो इसे वैज्ञानिक और पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है।

समापन

फूलों की घाटी फिर सज चुकी है। पगडंडियां जाग गई हैं, हवाएं फूलों की खुशबू से भर गई हैं और हिमालय एक बार फिर अपने सबसे खूबसूरत रूप में मुस्कुरा रहा है। लेकिन इस खूबसूरती के बीच एक संदेश भी साफ है—प्रकृति तभी तक सुंदर है, जब तक वह सुरक्षित है।

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