चमोली : एक साल में उजड़ गया पूरा परिवार, अब तीन बहनों की आंखों में सिर्फ डर और भविष्य की चिंता

Team PahadRaftar

एक्सक्लूसिव : एक साल में उजड़ गया पूरा परिवार, अब तीन बहनों की आंखों में सिर्फ डर और भविष्य की चिंता

गोपेश्वर / नंदानगर : चमोली जिले के नंदानगर विकासखंड के दूरस्थ बनाला गांव में एक परिवार पर ऐसा कहर टूटा कि एक साल के भीतर घर के चार सदस्य काल के गाल में समा गए। अब घर में बची हैं सिर्फ तीन मासूम बहनें और बिस्तर पर जिंदगी काट रही उनकी लकवाग्रस्त दादी।

15 साल की नीमा, 13 साल की सोनाक्षी और 10 साल की सुहानी के लिए अब जिंदगी किसी पहाड़ से कम नहीं रह गई है। पिता, चाचा और दादा की मौत के बाद मां ही इन बच्चियों का सहारा थीं, लेकिन 15 दिन पहले मां बीना देवी का भी निधन हो गया। इसके साथ ही तीनों बहनों के सिर से आखिरी साया भी उठ गया।

ग्रामीणों के मुताबिक सबसे पहले परिवार के मुखिया भगवान सिंह नेगी की मौत हुई। खेती-बाड़ी कर परिवार चलाने वाले भगवान सिंह के जाने के बाद चाचा महेंद्र सिंह नेगी ने जिम्मेदारी संभाली, लेकिन कुछ माह बाद उनकी भी मौत हो गई। इसके बाद बुजुर्ग दादा रणजीत सिंह ने किसी तरह परिवार को संभालने की कोशिश करते रहे, मगर एक माह पहले उनका भी निधन हो गया।

तीनों बच्चियों की मां बीना देवी मजदूरी कर बेटियों की पढ़ाई और घर का खर्च चला रही थीं। गांव वालों का कहना है कि पति और परिवार के अन्य सदस्यों को खोने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी, लेकिन बीमारी और आर्थिक तंगी के बीच आखिरकार उन्होंने भी दम तोड़ दिया।

अब घर में सिर्फ 60 वर्षीय दादी गोदांवरी देवी बची हैं, जो पिछले तीन वर्षों से लकवे से पीड़ित हैं और बिस्तर पर हैं। वह बोल भी ठीक से नहीं पातीं। ऐसे में तीनों बच्चियों का भविष्य अधर में लटक गया है।

ग्रामीण फिलहाल भोजन और जरूरी सामान जुटाकर बच्चियों की मदद कर रहे हैं, लेकिन गांव वालों का कहना है कि यह मदद ज्यादा दिनों तक संभव नहीं है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से तत्काल आर्थिक सहायता, बच्चियों की शिक्षा की जिम्मेदारी और सरकारी संरक्षण देने की मांग की है।

सबसे बड़ी बात यह है कि तीनों बच्चियां पढ़ना चाहती हैं। बड़ी बहन नीमा इंटर की छात्रा है, सोनाक्षी कक्षा 9 और सबसे छोटी सुहानी कक्षा 6 में पढ़ रही है। लेकिन हालात ऐसे हैं कि अब उनके सामने पढ़ाई से ज्यादा दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

बनाला गांव की यह कहानी सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि उन पहाड़ी गांवों की हकीकत भी है जहां एक हादसा पूरे परिवार को बिखेर देता है।

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