
कपाट बंद होने की उलटी गिनती शुरू, सुबह-शाम शीतलहर का प्रकोप; अलाव के सहारे कट रही कारोबारियों और साधु-संतों की रात
संजय कुंवर, बदरीनाथ धाम
हिमालय की ऊंची चोटियों के बीच बसी बदरीपुरी में अब सर्दी अपने तीखे तेवर दिखाने लगी है। सुबह का ब्रह्म मुहूर्त हो या सूर्यास्त के बाद का सन्नाटा, ठंडी हवाएं और गिरता तापमान लोगों की परीक्षा ले रहे हैं। रात में पारा शून्य से नीचे पहुंच रहा है। इसके बावजूद भगवान बदरी विशाल के दर्शन की अभिलाषा श्रद्धालुओं को ठिठुरन के बीच भी मंदिर तक खींच ला रही है। मौसम की सख्ती के सामने आस्था का यह दृश्य बदरीनाथ धाम की आध्यात्मिक ऊर्जा को बयां करता है।
चारधाम यात्रा अपने अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रही है। कपाट बंद होने की तिथि नजदीक आने के साथ ही यात्रा का माहौल और अधिक भावुक होता जा रहा है। श्रद्धालु इस पवित्र धाम में दर्शन का अवसर हाथ से जाने नहीं देना चाहते। शाम की शयन आरती तक मंदिर के सिंहद्वार के आसपास जुटे श्रद्धालु इसी अटूट विश्वास की तस्वीर पेश करते हैं। उनके लिए ठंड और ठिठुरन से ज्यादा महत्वपूर्ण भगवान के दर्शन हैं।
अलाव के सहारे गुजर रहे ठंडे दिन-रात
बदरीपुरी में तापमान गिरने के साथ ही जनजीवन पर ठंड का असर साफ दिखाई देने लगा है। होटल कारोबारी, दुकानदार और साधु-संत जगह-जगह अलाव जलाकर राहत पाने की कोशिश कर रहे हैं। मंदिर के आसपास के क्षेत्रों से लेकर प्रमुख तिराहों-चौराहों, बस स्टैंड और टैक्सी स्टैंड तक अलाव सर्द मौसम में सहारा बने हुए हैं।
यात्रा के अंतिम दिनों में धाम में मौजूद कारोबारियों के सामने भी ठंड से निपटने की चुनौती है। दिन में तीर्थयात्रियों की चहल-पहल के बीच कारोबार चलता है, लेकिन सुबह और शाम की ठिठुरन मुश्किलें बढ़ा देती है। साधु-संतों के लिए भी गिरता तापमान कठिन परीक्षा साबित हो रहा है।
प्रमुख स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की मांग
स्थानीय होटल कारोबारी राम नारायण भंडारी का कहना है कि नगर पंचायत बदरीनाथ को ठंड के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए धाम के सभी प्रमुख स्थानों पर पर्याप्त अलाव की व्यवस्था करनी चाहिए। इससे श्रद्धालुओं, स्थानीय कारोबारियों और अन्य लोगों को राहत मिल सकेगी।
बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने में अभी करीब 19 दिन शेष हैं। ऐसे में यात्रा के अंतिम चरण में ठंड का असर और बढ़ने की आशंका के बीच सार्वजनिक स्थानों पर अलाव की समुचित व्यवस्था महत्वपूर्ण हो जाती है।
बदरीपुरी में एक ओर हिमालयी सर्दी अपने तीखे तेवर दिखा रही है, तो दूसरी ओर श्रद्धालुओं की आस्था मंदिर की ओर बढ़ते कदमों में दिखाई दे रही है। शून्य से नीचे जाता तापमान शरीर को भले ही ठिठुरा रहा हो, लेकिन भगवान बदरी विशाल के दर्शन की चाह श्रद्धालुओं के उत्साह को कम नहीं कर पा रही है। यही आस्था बदरीनाथ धाम की पहचान है, जहां कठिन मौसम भी श्रद्धा के मार्ग में बाधा नहीं बनता।
