ऊखीमठ : मक्कूमठ से विदा हुई भगवती चामुण्डा की दिवारा यात्रा

Team PahadRaftar

जगपुड़ा में पुष्पवर्षा से हुआ डोली का स्वागत, 25 सितंबर को तुंगनाथ धाम पहुंचेगी यात्रा

लक्ष्मण नेगी

ऊखीमठ। तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ की घाटी में भगवती चामुण्डा की दिवारा यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है। बुधवार को तुंगनाथ के शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ में पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान के बाद भगवती चामुण्डा की डोली अगले पड़ाव के लिए रवाना हुई। जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने डोली को भावभीनी विदाई दी।

मक्कूमठ से जगपुड़ा पहुंचने पर ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ डोली का स्वागत किया। ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा कर भगवती चामुण्डा का अभिनंदन किया। महिलाओं ने मंगलगीत गाए और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर श्रद्धालुओं ने मां के जयकारे लगाए। इस दौरान दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु पहुंचे।

दिवारा यात्रा समिति के अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह सत्कारी ने बताया कि यात्रा तुंगनाथ घाटी के विभिन्न गांवों और धार्मिक स्थलों का भ्रमण करते हुए आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि दिवारा यात्रा धार्मिक आस्था के साथ पहाड़ की प्राचीन देवी परंपराओं और लोक संस्कृति से भी जुड़ी है। प्रत्येक पड़ाव पर ग्रामीण अपनी आराध्य देवी का स्वागत कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और जनकल्याण की कामना कर रहे हैं।

25 सितंबर को तुंगनाथ धाम पहुंचेगी डोली

समिति संयोजक कृपाल सिंह राणा ने बताया कि भगवती चामुण्डा की डोली 25 सितंबर को तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ धाम पहुंचेगी। यहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ परंपराओं का निर्वहन किया जाएगा। तुंगनाथ धाम में डोली के आगमन को लेकर घाटी के ग्रामीणों और श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है।

उन्होंने बताया कि तुंगनाथ धाम के दर्शन के बाद यात्रा मण्डल घाटी की ओर रवाना होगा। विभिन्न गांवों और धार्मिक स्थलों का भ्रमण करने के बाद भगवती चामुण्डा की दिवारा यात्रा भूवैकुंठ बदरीनाथ धाम के लिए प्रस्थान करेगी।

लोक संस्कृति की दिख रही झलक

समिति सलाहकार त्रिलोक सिंह रावत ने बताया कि दिवारा यात्रा हिमालयी लोकजीवन में देवी आराधना की प्राचीन परंपरा का प्रतीक है। यात्रा के दौरान धार्मिक अनुष्ठान, जागर, मंगलगीत और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की प्रस्तुतियां लोक संस्कृति को जीवंत कर रही हैं।

समिति उपाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह तिन्दोरी ने कहा कि मक्कूमठ से जगपुड़ा तक यात्रा में श्रद्धालुओं और ग्रामीणों की भागीदारी उत्साहजनक रही। अब सभी की नजरें 25 सितंबर को तुंगनाथ धाम में होने वाले भगवती चामुण्डा के आगमन पर टिकी हैं।

Leave a Reply

Next Post

चमोली : रांसी की तपस्थली से गूंजेगी मां राकेश्वरी की महिमा

भगवती राकेश्वरी महात्म्य’ में मद्महेश्वर घाटी की धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत होगी दर्ज पहाड़ रफ्तार  ऊखीमठ। मद्महेश्वर घाटी की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत अब किताब के पन्नों में दर्ज होगी। रांसी गांव की तपस्थली मां चंद्रकल्याणी भगवती राकेश्वरी की महिमा के साथ घाटी के प्रमुख तीर्थ, देवस्थल, लोक मान्यताएं और पौराणिक परंपराएं […]

You May Like