संजय कुंवर घांघरिया (चमोली)। यूनेस्को की विश्व धरोहर फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान इन दिनों देश-विदेश से पहुंच रहे रिकॉर्ड पर्यटकों की आमद से गुलजार है। पार्क प्रशासन की बेहतर व्यवस्थाओं के चलते पर्यटकों को प्रवेश द्वार पर दस्तावेजों की जांच और प्रवेश शुल्क जमा करने के बाद आसानी से परमिट उपलब्ध कराया जा रहा है। पर्यटकों ने प्रशासन की इस सुव्यवस्थित व्यवस्था की सराहना की है।
घाटी का भ्रमण कर लौटे ब्रिटिश प्रकृति प्रेमी कैली अगस्टस ने प्रवेश द्वार के समीप वनस्पति वैज्ञानिक जोन मार्गरेट लेगी के शोध से जुड़े सूचना बोर्ड और फूलों की घाटी के खोजकर्ता ब्रिटिश पर्वतारोही एवं वनस्पति विज्ञानी फ्रैंक स्माइथ तथा उनके साथियों की ऐतिहासिक तस्वीरों से सुसज्जित बोर्डों को देखकर खुशी जताई। उनका कहना था कि इससे घाटी के इतिहास और वैज्ञानिक महत्व को समझने में मदद मिलती है।
पार्क प्रशासन ने घाटी के भीतर दुर्लभ हिमालयी पुष्प प्रजातियों के समीप नए प्लांट आइडेंटिफिकेशन साइन (बॉटनिकल लेबल) लगाए हैं। इन पर पौधों का वैज्ञानिक नाम, सामान्य अंग्रेजी नाम और अन्य आवश्यक जानकारी अंकित की गई है। इसका उद्देश्य पर्यटकों, विद्यार्थियों, प्रकृति प्रेमियों और वनस्पति विज्ञानियों को दुर्लभ हिमालयी वनस्पतियों की सही पहचान और वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराना है।
ईको विकास समिति भ्यूंडार के अध्यक्ष प्रवेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि इन दिनों घांघरिया में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 20 अगस्त तक होटल कारोबारियों को भारतीय पर्यटक दलों की अच्छी बुकिंग मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि इस बार फूलों की घाटी का पर्यटन सीजन बेहद उत्साहजनक रहने की उम्मीद है।
उन्होंने बताया कि पर्यटकों और हेमकुंड साहिब आने वाले श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए ईको विकास समिति के पर्यावरण मित्र और सहयोगी स्टाफ युद्धस्तर पर सफाई, कूड़ा निस्तारण तथा घोड़ा, डंडी और कंडी संचालन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में जुटे हैं। ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और क्षेत्र का पर्यावरण भी स्वच्छ एवं सुरक्षित बना रहे।
