ऊखीमठ : तुंगनाथ यात्रा का पहला पड़ाव भुजगली बुग्याल, जहां हिमालय का सौंदर्य मोह लेता है मन

Team PahadRaftar

मखमली बुग्याल, दुर्लभ हिमालयी पुष्प और बर्फीली चोटियों के बीच प्रकृति का अनूठा संगम, स्थानीय युवाओं को भी मिल रहा रोजगार

लक्ष्मण नेगी ऊखीमठ। तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ धाम की यात्रा श्रद्धालुओं को केवल आध्यात्मिक अनुभूति ही नहीं कराती, बल्कि हिमालय की अद्भुत प्राकृतिक छटा से भी रूबरू कराती है। चोपता से पैदल यात्रा शुरू होने के कुछ ही समय बाद आने वाला भुजगली बुग्याल यात्रियों का पहला प्रमुख विश्राम स्थल है। यहां पहुंचते ही मखमली घास के विस्तृत मैदान, रंग-बिरंगे हिमालयी पुष्प, शीतल हवाएं और दूर तक फैली हिमाच्छादित पर्वत श्रृंखलाएं यात्रियों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं।

भुजगली बुग्याल में अधिकांश श्रद्धालु कुछ देर विश्राम कर आगे की चढ़ाई के लिए ऊर्जा जुटाते हैं। वसंत और शरद ऋतु में यहां का प्राकृतिक सौंदर्य अपने चरम पर होता है। सुबह की सुनहरी धूप पूरे बुग्याल को स्वर्णिम आभा से भर देती है, जबकि शाम के समय हिमालय की चोटियों पर पड़ती लालिमा मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करती है। साफ मौसम में यहां से हिमालय की कई ऊंची चोटियों के विहंगम दर्शन भी होते हैं।

भुजगली हिमालयी जैव विविधता का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां कस्तूरी मृग, हिमालयी मोनाल, लोमड़ी समेत कई दुर्लभ वन्यजीव और पक्षियों का प्राकृतिक आवास है। पर्यावरण संरक्षण को लेकर केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग और स्थानीय लोग समय-समय पर स्वच्छता एवं जागरूकता अभियान भी चलाते हैं।

तुंगनाथ यात्रा से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है। घोड़ा-खच्चर सेवा, होमस्टे, भोजनालय और स्थानीय उत्पादों की बिक्री के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को रोजगार मिल रहा है। मानसून में हरी-भरी वादियों और सर्दियों में बर्फ की सफेद चादर ओढ़े भुजगली बुग्याल का आकर्षण और बढ़ जाता है।

प्रकृति प्रेमी अनिल जिरवाण का कहना है कि भुजगली बुग्याल हिमालय की संस्कृति, आस्था और प्रकृति का जीवंत स्वरूप है। इसकी स्वच्छता और जैव विविधता को सुरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी है।

केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग की गुप्तकाशी रेंज के रेंज अधिकारी विमल कुमार भट्ट ने बताया कि भुजगली बुग्याल तुंगनाथ यात्रा का प्रथम पड़ाव होने के साथ हिमालय की अनमोल प्राकृतिक धरोहर भी है। बुग्यालों के संरक्षण और संवर्धन के लिए विभाग लगातार प्रयास कर रहा है, ताकि इसकी प्राकृतिक सुंदरता भविष्य में भी बनी रहे।

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