
चमोली की भर्ती ने पहाड़ में बेरोजगारी की असली तस्वीर उजागर की, एक पद के लिए 52 से अधिक अभ्यर्थी मैदान में
संजय कुंवर गोपेश्वर। चमोली जिले में होमगार्ड के 31 रिक्त पदों के लिए 1610 आवेदन आना केवल एक भर्ती प्रक्रिया नहीं, बल्कि उत्तराखंड के पहाड़ों में रोजगार के गहराते संकट का आईना है। सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि हाईस्कूल और स्नातक योग्यता वाली इस भर्ती में बीटेक, एमटेक और एलएलबी जैसी पेशेवर डिग्रियां हासिल कर चुके युवा भी आवेदन करने को मजबूर हैं।
यह आंकड़ा बताता है कि उच्च शिक्षा के बावजूद युवाओं को उनकी योग्यता के अनुरूप रोजगार नहीं मिल पा रहा है। सरकारी नौकरी की सुरक्षा और नियमित आय की उम्मीद उन्हें छोटे पदों के लिए भी लंबी कतार में खड़ा होने पर मजबूर कर रही है।
भर्ती के लिए 10 जून से 30 जून तक आवेदन आमंत्रित किए गए थे। अंतिम तिथि तक 1610 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें 173 आवेदन डाक के माध्यम से पहुंचे। भर्ती चमोली जिले के लिए होने के बावजूद हरियाणा और राजस्थान से भी आवेदन भेजे गए। हालांकि, नियमों के अनुसार बाहरी राज्यों और अन्य जिलों से आए आवेदन निरस्त कर दिए गए हैं।
प्रभारी जिला कमांडेंट होमगार्ड दीपक कुमार भट्ट के अनुसार 9 जुलाई तक सभी आवेदनों की स्क्रूटनी पूरी कर ली जाएगी, जबकि 10 जुलाई से चयन प्रक्रिया शुरू होगी। भर्ती केवल पुरुष अभ्यर्थियों के लिए है, इसलिए महिला अभ्यर्थियों के आवेदन स्वीकार नहीं किए गए।
पहाड़ में रोजगार का बढ़ता संकट
चमोली सहित पूरे पर्वतीय क्षेत्र में निजी क्षेत्र के रोजगार के अवसर बेहद सीमित हैं। उद्योगों की कमी और सरकारी भर्तियों का लंबा इंतजार युवाओं को किसी भी उपलब्ध सरकारी नौकरी की ओर आकर्षित कर रहा है। यही वजह है कि तकनीकी और पेशेवर शिक्षा प्राप्त युवा भी होमगार्ड जैसी भर्ती में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
एक पद पर 52 से ज्यादा दावेदार
31 पदों के लिए 1610 आवेदन का मतलब है कि एक पद के लिए औसतन 52 से अधिक अभ्यर्थी दावेदारी कर रहे हैं। ऐसे में शारीरिक दक्षता परीक्षा, दस्तावेज सत्यापन और अंतिम चयन प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा बेहद कठिन रहने वाली है।
पहाड़ रफ्तार विश्लेषण
चमोली की यह भर्ती केवल चयन प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक बड़ा सामाजिक संदेश भी दे रही है। जब इंजीनियरिंग और पेशेवर डिग्रीधारक युवा भी साधारण सरकारी पदों के लिए आवेदन कर रहे हों, तो यह संकेत है कि प्रदेश में कौशल आधारित रोजगार, स्थानीय उद्योगों और स्वरोजगार के अवसरों को तेजी से बढ़ाने की जरूरत है। अन्यथा उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं का पलायन और बेरोजगारी दोनों आने वाले वर्षों में और गंभीर चुनौती बन सकते हैं।

