उर्गमघाटी : पल्ला – जखोला गांव में मणों मेला संपन्न, मां भगवती आशीष देकर कैलाश को हुई विदा

Team PahadRaftar

रघुबीर नेगी 

उर्गमघाटी  : पल्ला – जखोला गांव में तीन दिवसीय मणों मेला हुआ संपन्न, सुख समृद्धि खुशहाली का आशीष देकर मां भगवती नन्दा स्वनूल कैलाश को हुई विदा।

40 वर्षों के लम्बे अन्तराल के बाद उर्गमघाटी के पड़ोसी गांव सनवैली के नाम से प्रसिद्ध पल्ला – जखोला में नन्दा आठों मणों मेला पौराणिक परम्परा के अनुसार सम्पन्न हो गया। विगत तीन दिनों से चला आ रहा मेले में हजारों लोगों ने प्रतिभाग कर भगवती से सुख समृद्धि की कामना की। अलकनंदा के पार की घाटियां अपनी पौराणिक संस्कृति का संरक्षण सदियों से करती आ रही है ये घाटियां उर्गम थात पंचगैं दयोखार पट्टी के नाम से जानी जाती है इन्हीं घाटियों में हर बारह वर्षों में मणों मेलों का आयोजन होता है।

मणों मेला से पहले नन्दी कुंड जात का आयोजन होता है जिसमें नन्दी कुंड से भगवती नन्दा और सोना शिखर से भगवती स्वनूल देवी को बुलाया जाता है और फिर मार्गशीर्ष माह में निर्धारित तिथि को तीन दिवसीय मणों मेला शुरू होता है। पहले दिन ध्वजारोहण प्रतिमाओं का निर्माण जिसे स्थानीय भाषा में म्वाड़ लेखन कहा जाता है जागरों के माध्यम से पंचनाम देवताओं को बुलाया जाता है द्वितीय दिवस में न्यूतारू विभिन्न गांवों के भूमि क्षेत्र पाल मेले में बुलाये जाते है। पल्ला जखोला में इस बार बमैं आठो का आयोजन हुआ जिसमें भूमि क्षेत्र पाल घंटाकर्ण मुख्य अतिथि है घंटाकर्ण मेले का उद्घाटन करते है जिसे स्थानीय भाषा में तोंड़ी तोड़ना कहां जाता है न्यूतारू में उर्गम घंटाकर्ण सबसे पहले पहुंच कर मेले का शुभारंभ करते है उसके उपरांत मां चंडिका किमाणा मेले में पहुंचकर भंडार का उद्घाटन करती है और सभी भक्तों को प्रसाद भोग बनाने का आदेश देती है उसके बाद द्वींग, तपोण व भर्की के न्यूतारू पहुंचते हैं। रात्रि में दाकुंडी झूमेलों नृत्य होता तथा जागर गायन होता है जिसमें नन्दा का जन्म विवाह दैत्य संहार कन्नौज राजा जशधवल की यात्रा समेत विभिन्न कथाओं का वर्णन किया जाता है। मेले के तीसरे दिन गणचक्र का आयोजन होता है जिसमें सभी देवता शक्ति प्रदर्शन करते हैं जिसे आसण लेना कहा जाता है। पल्ला भूमियाल घंटाकर्ण वजीर देवता कौधूड़िया कलगोठ जाख देवता जखोला मां चंडिका विश्वकर्मा की मौजूदगी में नन्दा स्वनूल देवी को समझा बुझाकर नन्दीकुड और सोना शिखर के लिए विदा इस आशा के साथ करते है कि अगले मणों मेला में फिर से आपको बुलाया जायेगा जो क्वीस्योर में आयोजित होगा इसका आयोजन पल्ला, जखोला, किमाणा के ग्राणीण करते हैं।

नन्दा स्वनूल देवी सुख समृद्धि खुशहाली का आशीर्वाद देकर भावुक होकर मायके से विदा देती है। पल्ला भूमियाल जाख देवता जखोला सभी देवी देवताओं को विदा करते है। सूदूरवर्ती क्षेत्रों में इस तरह के शानदार व्यवस्था एवं सफल आयोजन के लिए सम्पूर्ण पल्ला जखोला वासी मेला कमेटी ग्राम पंचायत महिला मंगल दल युवक मंगल दल पल्ला जखोला को ढेर सारी शुभकामनाएं एवं बधाइयां ।

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