अधिकारियों ने लिखित रूप से दिया तीन महीने का भरोसा, समयसीमा में काम नहीं हुआ तो फिर सड़क काटेंगे ग्रामीण
केएस असवाल | कर्णप्रयाग
कर्णप्रयाग। वर्षों से सड़क का इंतजार कर रहे सकंड गांव के ग्रामीणों के संघर्ष के बाद अब प्रशासन ने तीन महीने की स्पष्ट समयसीमा तय की है। डीएफओ, एसडीएम और लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता की मौजूदगी में ग्रामीणों को लिखित रूप से आश्वासन दिया गया कि अगले तीन महीनों के भीतर सड़क निर्माण की दिशा में ठोस कार्रवाई की जाएगी।

ग्रामीणों ने अधिकारियों के गांव पहुंचने और लिखित आश्वासन को देखते हुए फिलहाल अपने आंदोलन को रोकने का फैसला किया है। लेकिन इस बार भरोसे के साथ समयसीमा भी तय है। ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि तीन महीने के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो सड़क कटिंग का काम फिर शुरू किया जाएगा।
ग्राम प्रधान शिवानी चौधरी ने कहा कि प्रशासन ने गांव पहुंचकर तीन महीने का लिखित आश्वासन दिया है। ग्रामीण इस समयसीमा तक इंतजार करेंगे। यदि इस अवधि में सड़क निर्माण की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण दोबारा सड़क कटिंग शुरू करेंगे।
सड़क के लिए ग्रामीण लंबे समय से अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काटते रहे हैं। जब लगातार मांग के बावजूद स्थिति नहीं बदली तो ग्रामीणों ने खुद सड़क कटिंग शुरू कर दी। ग्रामीणों का यह कदम सड़क की जरूरत और लंबे समय से चले आ रहे इंतजार को सामने लाने वाला रहा।
अब तीन महीने की समयसीमा प्रशासन के सामने भी एक स्पष्ट कसौटी है। इस अवधि में सर्वे, वन भूमि संबंधी कार्रवाई, स्वीकृति और सड़क निर्माण की प्रक्रिया किस स्तर तक पहुंचती है, यह महत्वपूर्ण होगा।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें अब नया आश्वासन नहीं चाहिए। तीन महीने पूरे होने तक सड़क निर्माण की दिशा में दिखाई देने वाली ठोस कार्रवाई चाहिए।
अब सकंड की निगाहें अगले तीन महीनों पर हैं। समयसीमा पूरी होने के बाद ग्रामीणों को सड़क की दिशा में प्रगति दिखाई देती है या फिर उन्हें दोबारा औजार उठाने पड़ते हैं—यह आने वाला समय तय करेगा।

