अस्त्र-शस्त्र और कटार भेद से देवताओं ने दिखाई शक्ति, झोड़ा-चांचरी और नंदा जयकारों से गूंजा नंदाक का अंतिम गांव
नंदाभक्तों के लिए ग्रामीणों ने खोले घरों के दरवाजे, निशुल्क भोजन और ठहरने की व्यवस्था से बढ़ा आतिथ्य का मान
पहाड़ रफ्तार
चमोली/कनोल। हिमालय की तलहटी में बसे नंदाक के अंतिम गांव कनोल में मंगलवार को आस्था, परंपरा और लोक संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। मां नंदा की बड़ी जात ने कनोल गांव में ही प्रवास किया। देव डोलियों, निशाणों, सैकड़ों छंतोलियों और हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी से पूरा गांव नंदामय नजर आया। देवताओं ने पारंपरिक अस्त्र-शस्त्र और कटार भेद के हैरतअंगेज प्रदर्शन से अपनी शक्ति का परिचय दिया तो ग्रामीणों और श्रद्धालुओं के झोड़ा-चांचरी और नंदा के जयकारों से कनोल की पहाड़ियां गूंजती रहीं।

बीते दो दिनों से बारिश के कारण बड़ी जात में शामिल श्रद्धालुओं की चिंता बढ़ी हुई थी, लेकिन मंगलवार को मौसम ने राहत दी। सुबह से ही कनोल की ओर श्रद्धालुओं का रेला उमड़ता रहा। हर कोई मां नंदा भगवती की बड़ी जात में शामिल होकर देवी के दर्शन और आशीर्वाद लेने को आतुर नजर आया।
देव डोलियों के दर्शन को उमड़ा आस्था का सैलाब
कनोल पहुंची कुरूड-दशोली की नंदा डोली, बंड की नंदा डोली, ल्वाणी की ज्वाल्पा देवी की डोली, बंड भूमियाल की छंतोली, गेदाणु देवता की छंतोली सहित विभिन्न देव डोलियों और छंतोलियों की श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। ग्रामीणों और नंदाभक्तों ने देव डोलियों को समौंण भेंट कर परिवार और गांव की सुख-समृद्धि की कामना की।

सैकड़ों छंतोलियों और हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी से बड़ी जात का स्वरूप भव्य और दिव्य नजर आया। पूरे दिन गांव में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ लोक संस्कृति की रंगत भी देखने को मिली।
झोड़ा-चांचरी से नंदामय हुआ कनोल
कनोल में दिनभर ग्रामीण पारंपरिक परिधानों में नजर आए। महिलाओं और पुरुषों ने सामूहिक रूप से झोड़ा और चांचरी नृत्य किया। नंदा के लोकगीतों और जागरों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। जगह-जगह मां नंदा के जयकारे गूंजते रहे। लोक परंपराओं और धार्मिक आस्था का यह संगम बड़ी जात को और भी जीवंत बना रहा था।
बंड परगने से बड़ी जात में शामिल होने पहुंचे शंभू प्रसाद सती ने बताया कि वह 1987, 2000 और 2014 की बड़ी जात के साथ नंदा राजजात में भी होमकुंड तक जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस बार बड़ी जात में जिस तरह निस्वार्थ सेवा और आस्था के साथ श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है, वह पहले कभी देखने को नहीं मिला। उन्होंने इसे मां नंदा भगवती की कृपा बताते हुए कहा कि ग्रामीणों के सहयोग से बिना किसी सरकारी सहायता के भी आयोजन को सुगम बनाया जा रहा है।
नंदाभक्तों के लिए खुल गए ग्रामीणों के घर
कनोल जैसे सुदूर सीमांत गांव में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के बीच ग्रामीणों ने सेवा और आतिथ्य की मिसाल पेश की। सोमवार रात से ही नंदाभक्तों का गांव पहुंचना शुरू हो गया था। मंगलवार को भी श्रद्धालुओं का हुजूम पहुंचता रहा।

ग्रामीणों ने आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भोजन, पानी और ठहरने की निशुल्क व्यवस्था की। अपने सीमित संसाधनों के बावजूद ग्रामीणों ने अपने घरों के दरवाजे नंदाभक्तों के लिए खोल दिए। बड़ी जात में शामिल हजारों श्रद्धालुओं ने कनोल के ग्रामीणों के इस सेवाभाव और आतिथ्य की जमकर सराहना की।
बुधवार को वाण गांव पहुंचेगी बड़ी जात
कनोल में प्रवास के बाद मां नंदा की बड़ी जात बुधवार को अगले पड़ाव वाण गांव के लिए रवाना होगी। इसके साथ ही नंदा की इस दिव्य यात्रा में श्रद्धालुओं का कारवां आगे बढ़ेगा।

