हिमालय का अनमोल ‘हीरा’
जिसने पहाड़ की पगडंडियों से लिखी स्वरोजगार, पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण की नई इबारत
रिपोर्ट : विशेष संवाददाता
चमोली : हिमालय की गोद में बसे सीमांत गांव वाण की सुबह जब बुग्यालों पर बिखरी सुनहरी धूप के साथ जागती है, तब वहां एक ऐसा शख्स भी अपनी दिनचर्या शुरू करता है, जिसने पहाड़ के संसाधनों में रोजगार, प्रकृति में भविष्य और पर्यटन में विकास की नई संभावनाएं खोजी हैं। यह कहानी है वाण गांव के ट्रेकिंग गाइड, होमस्टे संचालक और पर्यावरण प्रहरी की, जिन्हें इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रतिष्ठित गौरा देवी सम्मान से सम्मानित किया जाएगा।
यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस सोच का सम्मान है जो मानती है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो तो हिमालय की ऊंचाइयों में भी रोजगार की असीम संभावनाएं छिपी हैं।
चाय की दुकान से ट्रेकिंग की दुनिया तक
आज देशभर के पर्यटक जिस हीरा सिंह बिष्ट को एक सफल ट्रेकिंग गाइड के रूप में जानते हैं, उनका सफर बेहद साधारण परिस्थितियों से शुरू हुआ। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार में जन्मे हीरा ने बचपन में ही संघर्षों का सामना किया। पढ़ाई जारी रखने के लिए उन्होंने किशोरावस्था में ही पर्यटकों को घुमाने का काम शुरू कर दिया था।
आगे चलकर उन्होंने चाय की दुकान खोली, छोटा ढाबा चलाया, फोटोग्राफी की और कॉमन सर्विस सेंटर भी संचालित किया। लेकिन उनके मन में हमेशा हिमालय बसता रहा। यही लगाव उन्हें ट्रेकिंग के क्षेत्र में ले आया। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने बैंक से ऋण लेकर टेंट, स्लीपिंग बैग और अन्य उपकरण खरीदे और अपने सपनों को उड़ान दी।
धीरे-धीरे एक पर्यटक दूसरे को और एक समूह दूसरे समूह को उनकी सिफारिश करने लगा। देखते ही देखते हीरा सिंह बिष्ट का नाम उत्तराखंड के भरोसेमंद ट्रेकिंग गाइडों में शामिल हो गया।
ट्रेकिंग नहीं, हिमालय से प्रेम का पाठ पढ़ाते हैं
हीरा की पहचान केवल एक ट्रेकिंग गाइड की नहीं है। वे उन लोगों में शामिल हैं जो पर्यटकों को हिमालय की खूबसूरती के साथ उसकी संवेदनशीलता का भी अहसास कराते हैं।
रूपकुंड, ब्रह्मताल, आली-बेदनी बुग्याल, फूलों की घाटी और पिंडारी जैसे ट्रेकों पर जाने वाले पर्यटकों को वे साफ संदेश देते हैं—“हिमालय केवल घूमने की जगह नहीं, हमारी धरोहर है।”
वेदनी बुग्याल और अन्य ट्रेक मार्गों पर फैले कचरे को एकत्रित कर नीचे लाना उनकी आदत बन चुकी है। वृक्षारोपण अभियानों में भी वे बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। यही वजह है कि उनके साथ ट्रेकिंग करने वाले पर्यटक लौटते समय केवल तस्वीरें ही नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण का संदेश भी अपने साथ ले जाते हैं।
जब होमस्टे बना गांव की आर्थिकी का आधार
हीरा सिंह बिष्ट ने बहुत पहले समझ लिया था कि पर्यटन का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब पर्यटक गांवों में ठहरेंगे और स्थानीय संस्कृति को करीब से जानेंगे।
इसी सोच के साथ उन्होंने वाण गांव में होमस्टे की शुरुआत की। शुरुआत में यह प्रयोग था, लेकिन धीरे-धीरे यह मॉडल पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गया। आज वाण और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवार होमस्टे के माध्यम से आय अर्जित कर रहे हैं।
उनका मानना है कि होमस्टे केवल ठहरने की व्यवस्था नहीं, बल्कि पहाड़ की संस्कृति, खानपान और जीवनशैली से परिचय कराने का माध्यम है।
मोनाल टॉप : एक खोज जिसने बदल दी तस्वीर
करीब आठ वर्ष पहले हीरा सिंह बिष्ट और उनके साथी देवेन्द्र बिष्ट ने हिमालय की वादियों में छिपे एक ऐसे स्थल को पहचान दिलाई, जो आज साहसिक पर्यटन का आकर्षण बन चुका है—मोनाल टॉप।
समुद्र तल से लगभग 12,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह ट्रैक चौखंभा, नंदा देवी, त्रिशूल, हाथी-घोड़ा पर्वत और अन्य हिमालयी चोटियों के अद्भुत दर्शन कराता है। यहां का सूर्योदय, विंटर लाइन और मखमली बुग्याल पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं।
एक समय गुमनाम रहा यह ट्रैक आज स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार का नया स्रोत बन चुका है। पिछले कुछ वर्षों में सैकड़ों ट्रेकिंग समूह यहां पहुंच चुके हैं और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है।
हिमालय जैसा हौसला
जीवन में कई उतार-चढ़ाव आए। पिता की असमय मृत्यु ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया, लेकिन परिवार की जिम्मेदारियों ने उन्हें टूटने नहीं दिया। उन्होंने हर चुनौती को अवसर में बदला और साबित किया कि मेहनत, ईमानदारी और अपने परिवेश पर भरोसा किसी भी व्यक्ति को सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।
आज हीरा सिंह बिष्ट स्वयं रोजगार प्राप्त करने के साथ-साथ 30 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं। उनके प्रयासों से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिला है, बल्कि पलायन रोकने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी मदद मिली है।
सम्मान से बढ़ा गौरव
विश्व पर्यावरण दिवस पर मिलने वाला गौरा देवी सम्मान हीरा सिंह बिष्ट की वर्षों की मेहनत, पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता और ग्रामीण पर्यटन के विकास में योगदान का सम्मान है। यह पुरस्कार उन हजारों युवाओं के लिए भी प्रेरणा है जो रोजगार के लिए शहरों की ओर पलायन को ही एकमात्र विकल्प मानते हैं।
वाण गांव का यह ‘अनमोल हीरा’ आज यह संदेश दे रहा है कि यदि दृष्टि सकारात्मक हो तो हिमालय की चोटियों के बीच भी सपनों को साकार किया जा सकता है। उसकी कहानी बताती है कि पहाड़ केवल संघर्ष की भूमि नहीं, बल्कि अवसरों का अथाह संसार भी है।

