
जसपाल नेगी संवाददाता, पौड़ी : जिले में जल स्रोतों के संरक्षण और नदियों के पुनर्जीवन के कार्यों को अब सीधे पेयजल योजनाओं से जोड़ा जाएगा। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पुनर्जीवित जलधाराओं और नौलों का लाभ सीधे स्थानीय लोगों तक पहुंचे, इसके लिए उन्हें जल संस्थान और जल निगम की योजनाओं के साथ एकीकृत किया जाए।
शनिवार को जल स्रोत एवं नदी पुनर्जीवन प्राधिकरण की जिला स्तरीय कार्यकारी समिति की बैठक में जिलाधिकारी ने जनपद के जल स्रोतों के संरक्षण, भूजल संवर्धन तथा पूर्वी और पश्चिमी नयार नदी के पुनर्जीवन से संबंधित प्रस्तावों और डीपीआर की समीक्षा की।
विकासखंड कोट के ग्राम मुछियाली स्थित प्राकृतिक पेयजल स्रोत के पुनर्जीवन प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए डीएम ने कहा कि सभी परियोजनाओं में स्पष्ट और मापनीय लक्ष्य तय किए जाएं। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण योजनाओं का उद्देश्य केवल संरचनाओं का निर्माण नहीं, बल्कि लोगों को स्थायी जल उपलब्धता सुनिश्चित करना होना चाहिए।
पूर्वी और पश्चिमी नयार नदी के पुनर्जीवन की समीक्षा के दौरान उन्होंने जल संकट वाले क्षेत्रों में माइक्रो वाटरशेड आधारित कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि डीपीआर को केवल कागजी औपचारिकता न बनाकर उसका स्थलीय सत्यापन भी कराया जाए, ताकि योजनाओं का वास्तविक असर जल स्रोतों और पेयजल उपलब्धता पर दिखाई दे।
जल स्रोतों का होगा वैज्ञानिक सर्वे
जिलाधिकारी ने जनपद के सभी छोटे-बड़े जल स्रोतों का वैज्ञानिक चिन्हीकरण और वर्तमान स्थिति का आकलन करने के निर्देश दिए। इसके लिए विभागीय अधिकारियों की समिति गठित की जाएगी, जो पश्चिमी नयार की छह सहायक नदियों सहित अन्य जल स्रोतों का स्थलीय निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार करेगी।
चेकडैम, चाल-खाल और पौधरोपण पर रहेगा जोर
बैठक में बताया गया कि जल संरक्षण और पुनर्भरण के लिए चेकडैम, कंटूर ट्रेंच, चाल-खाल, रिचार्ज पिट और क्रेट वायर संरचनाओं का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा व्यापक पौधरोपण, जलागम आधारित उपचार, तालाब निर्माण, माइक्रोप्लानिंग, जियोटैगिंग और डिजिटल मॉनिटरिंग को भी परियोजनाओं का हिस्सा बनाया जाएगा।
डीएम ने कहा कि इन उपायों से भूजल स्तर में सुधार, मृदा संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन को मजबूती मिलेगी। उन्होंने सभी जल संरक्षण कार्यों को जियोटैग लोकेशन के आधार पर कराने के निर्देश देते हुए पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
जल संरक्षण से जुड़ेगी आजीविका
बैठक में जल संरक्षण को कृषि और ग्रामीण आजीविका से जोड़ने पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि चयनित क्षेत्रों में कीवी और सेब जैसी उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों को बढ़ावा देने की योजना पर कार्य किया जाएगा। इससे जल संरक्षण के साथ स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अशोक जोशी सहित वन, जल संस्थान, जल निगम, कृषि, उद्यान और आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

