चार साल से लंबित भुगतान और इंटरनेट सुविधा नहीं होने पर नाराजगी, सात सूत्रीय मांगपत्र सौंपा
संजय कुंवर ज्योतिर्मठ। सीमांत विकासखंड ज्योतिर्मठ के ग्राम प्रधानों ने बीपीओ जी. राम जी योजना से जुड़ी समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर सरकार को अल्टीमेटम दिया है। प्रधान संगठन ने उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री और ग्रामीण विकास मंत्रालय को सात सूत्रीय ज्ञापन भेजकर शीघ्र कार्रवाई की मांग की है। मांगें पूरी नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
प्रधान संगठन के अध्यक्ष मोहन बैंजवाल के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि विकासखंड के 58 गांवों में इंटरनेट सुविधा नहीं होने से ऑनलाइन कार्य व्यवस्था प्रभावित हो रही है। कई गांवों में केवल कॉलिंग नेटवर्क उपलब्ध है, जिससे मनरेगा समेत अन्य योजनाओं का संचालन करने में दिक्कतें आ रही हैं। प्रधानों ने इंटरनेट सुविधा उपलब्ध होने तक कार्यों को ऑफलाइन माध्यम से संचालित करने की मांग की है।
प्रधानों ने मनरेगा मजदूरी 700 रुपये प्रतिदिन और मिस्त्री की मजदूरी 1000 रुपये करने के साथ रोजगार की अवधि 100 दिन से बढ़ाकर 200 दिन किए जाने की भी मांग उठाई है। उनका कहना है कि वर्तमान मजदूरी दर पर सीमांत क्षेत्र में श्रमिक काम करने को तैयार नहीं हैं।
ज्ञापन में दुर्गम क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए निर्माण कार्यों के लिए साइट के अनुसार अलग-अलग स्टीमेट तैयार करने और ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए हाई एल्टीट्यूड इंडेक्स लागू करने की मांग की गई है।

प्रधान संगठन ने आरोप लगाया कि मनरेगा के तहत मटेरियल मद का भुगतान पिछले चार वर्षों से लंबित है। रोजगार सेवकों का वेतन भी लंबे समय से नहीं मिला है, जिससे ग्राम पंचायतों के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इंटरनेट सुविधा नहीं होने से श्रमिकों की फेस अटेंडेंस दर्ज करने में भी परेशानी हो रही है।
प्रधानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो सीमांत विकासखंड में बीपीओ जी. राम जी योजना के कार्यों का विरोध किया जाएगा और ग्राम प्रधान ग्रामीणों के साथ आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

