चमोली : गौरा देवी सम्मान 2026 : रंजना रावत नेगी को मिलेगा सम्मान, रिवर्स माइग्रेशन और वेडिंग टूरिज्म से पहाड़ में रोजगार की नई इबारत

Team PahadRaftar

गौरा देवी सम्मान 2026 : रंजना रावत नेगी को मिलेगा सम्मान, रिवर्स माइग्रेशन और वेडिंग टूरिज्म से पहाड़ में रोजगार की नई इबारत

पहाड़ रफ्तार चमोली : विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मिलेट वैली उर्गमघाटी में इस वर्ष का प्रतिष्ठित गौरा देवी सम्मान केदारघाटी की बेटी एवं युवा आइकॉन रंजना रावत नेगी को प्रदान किया जाएगा। उन्हें यह सम्मान पहाड़ों में रिवर्स माइग्रेशन को बढ़ावा देने, स्वरोजगार सृजन और वेडिंग प्लानर के रूप में रुद्रप्रयाग जनपद के प्रसिद्ध त्रियुगीनारायण मंदिर को वैश्विक वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जा रहा है।

शहर की नौकरी छोड़ गांव की माटी में रची सफलता की कहानी

फार्मेसी में डिग्री प्राप्त करने के बाद रंजना रावत नेगी ने एक मल्टीनेशनल कंपनी में प्रोडक्शन मैनेजर के रूप में कार्य किया, लेकिन पहाड़ की मिट्टी से लगाव उन्हें वापस अपने गांव खींच लाया। पिछले 15 वर्षों से वे रिवर्स माइग्रेशन मॉडल को धरातल पर उतारने में जुटी हैं।

भीरी गांव को केंद्र बनाकर उन्होंने मशरूम उत्पादन, सब्जी खेती, फूल उत्पादन, अमेरिकन केसर और कीवी उत्पादन जैसे स्वरोजगार मॉडल विकसित किए। 80 नाली भूमि पर शुरू किए गए इस प्रयोग ने न केवल उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया, बल्कि सैकड़ों ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए रास्ते भी खोले।

50 हजार से अधिक लोगों को दिया प्रशिक्षण

रंजना रावत नेगी अब तक 50 हजार से अधिक लोगों को स्वरोजगार एवं कृषि आधारित उद्यमिता का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। उनकी संस्था गढ़माटी के माध्यम से रुद्रप्रयाग जिले की दो हजार से अधिक महिलाओं को मशरूम उत्पादन से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया गया है।

वे वर्तमान में मल्टीलेवल स्वरोजगार मॉडल पर काम कर रही हैं, जिसमें मुर्गी पालन, मत्स्य पालन, मौन पालन और डेयरी जैसे क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है।

त्रियुगीनारायण बना वेडिंग डेस्टिनेशन का नया ब्रांड

त्रियुगीनारायण मंदिर आज देशभर में वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में तेजी से पहचान बना रहा है। सरकार की वेडिंग टूरिज्म नीति के बीच रंजना रावत नेगी के प्रयासों ने इस क्षेत्र को नई दिशा दी है।

यहां हर वर्ष हो रही सैकड़ों शादियों से स्थानीय युवाओं, महिलाओं और छोटे व्यवसायियों को व्यापक रोजगार मिल रहा है। टेंट, कैटरिंग, होमस्टे और परिवहन क्षेत्र में भी आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं।

पलायन रोकने की ‘चट्टान’ बनी रंजना

रंजना रावत नेगी को उनके कार्यों के लिए कई मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें राज्य सरकार द्वारा उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय भरसार का सदस्य नामित किया गया है तथा जिला प्रशासन द्वारा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान का ब्रांड एंबेसडर भी बनाया गया है।

वे वर्तमान में ग्राम्य विकास और पलायन आयोग की सदस्य के रूप में भी सक्रिय हैं और पहाड़ों से पलायन रोकने के लिए धरातलीय योजनाओं को आगे बढ़ा रही हैं।

मायके से ससुराल तक बंजर भूमि को बनाया उपजाऊ

भीरी गांव से शुरू हुआ उनका मॉडल अब ससुराल क्षेत्र तक फैल चुका है। रंजना ने रुद्रप्रयाग के धनपुर पट्टी स्थित पाबौ गांव में वर्षों से बंजर पड़ी भूमि को ग्रामीणों की सहभागिता से फिर से उपजाऊ बनाने की पहल की है।

गढ़ माटी के जरिए पहाड़ी उत्पादों को मिल रहा नया बाजार

रंजना रावत नेगी, जो ‘गढ़ माटी’ की सीईओ हैं, पहाड़ी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रही हैं। संस्था के माध्यम से बुरांस जूस, माल्टा जूस, तिमला अचार, नींबू, लहसुन, आंवला और मिर्ची जैसे पारंपरिक उत्पादों को ब्रांडिंग और बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है।

इस पहल से स्थानीय लोगों को जहां स्वरोजगार के अवसर मिल रहे हैं, वहीं पहाड़ी उत्पादों को भी एक नई पहचान और व्यापक बाजार मिल रहा है।

पुरस्कार मिलने पर रंजना रावत नेगी ने कहा

गौरा देवी सम्मान मिलना मेरे लिए गर्व और जिम्मेदारी दोनों है। यह सम्मान केवल मेरा नहीं, बल्कि उन सभी ग्रामीणों, महिलाओं और युवाओं का है जिन्होंने मेरे साथ मिलकर स्वरोजगार और रिवर्स माइग्रेशन के इस सफर को आगे बढ़ाया है।

मैंने हमेशा प्रयास किया है कि पहाड़ों से पलायन रुके और लोग अपने गांव में ही सम्मानजनक आजीविका पा सकें। त्रियुगीनारायण को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में पहचान दिलाने से लेकर ‘गढ़ माटी’ के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने तक यह पूरी यात्रा सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। यह सम्मान मुझे और अधिक ऊर्जा देता है कि मैं पहाड़ के हर गांव तक स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता का यह मॉडल पहुंचा सकूं।

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