पोखरी : पम्मी नवल के जागरों पर देर रात तक झूमे दर्शक

Team PahadRaftar

पोखरी शरदोत्सव की तीसरी सांस्कृतिक संध्या में लोक संस्कृति की धूम, राजेंद्र भंडारी बोले—मेले पर सभी क्षेत्रवासियों का समान अधिकार

केएस असवाल

पोखरी। 20वें हिमवत कवि चंद्र कुंवर बर्त्वाल खादी ग्रामोद्योग एवं शरदोत्सव मेले की तीसरी सांस्कृतिक संध्या लोक जागर गायिका पम्मी नवल के नाम रही। उनके ‘हे मां नंदा’, ‘भैरव जागर’ और ‘द्रौपदी स्वयंवर’ जैसे प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लोकगीतों और जागरों की धुन पर दर्शक देर रात तक झूमते रहे।

सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ मुख्य अतिथि गजपाल सिंह हमाल और विशिष्ट अतिथि राजकीय इंटर कॉलेज चौंडी के प्रधानाचार्य मनवर सिंह बर्त्वाल ने किया। मेला समिति की ओर से पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं मेले के संस्थापक राजेंद्र सिंह भंडारी ने अतिथियों और लोक गायिका पम्मी नवल को सम्मानित किया।

‘पोखरी की पहचान है मेला’

राजेंद्र सिंह भंडारी ने कहा कि यह मेला पोखरी के लोगों का अपना आयोजन है। इस पर सभी क्षेत्रवासियों का समान अधिकार है। मेला क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और आपसी भाईचारे को मजबूत करने का माध्यम है। ऐसे आयोजनों से स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिलने के साथ लोक संस्कृति को भी बढ़ावा मिलता है।

भंडारी ने कहा कि वर्ष 2006 में मेले की शुरुआत के बाद पिछले 19 वर्षों तक खादी ग्रामोद्योग से आयोजन के लिए धनराशि स्वीकृत होती रही, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें मेले के आयोजन का अवसर न देने के उद्देश्य से धनराशि स्वीकृत नहीं की गई। उन्होंने कहा कि पोखरी की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े इस मेले का आयोजन हर हाल में जारी रहना चाहिए।

कार्यक्रम में नगर पंचायत अध्यक्ष सोहन लाल, सभासद गिरीश किमोठी, सतेन्द्र बुटोला, डॉ. बृजेन्द्र कठैत, शिक्षक संगठन के जिलाध्यक्ष उपेन्द्र सती और संतोष चौधरी सहित अन्य लोग मौजूद रहे। संचालन टीपी सती ने किया।

 

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