छात्र-छात्राओं और महिला समूहों को मंडुवा-झंगोरा की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग व ब्रांडिंग का महत्व बताया
लक्ष्मण नेगी ऊखीमठ। केदारनाथ हिमालय के पारंपरिक मोटे अनाजों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने की पहल तेज हो गई है। छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला के तीसरे दिन शुक्रवार को राजकीय इंटर कालेज जवाहर नगर, मयकोटी में छात्र-छात्राओं और महिला समूहों को मोटे अनाजों के पोषण मूल्य, वैज्ञानिक प्रसंस्करण और स्वरोजगार की संभावनाओं की जानकारी दी गई।

रिपब्लिक फाउंडेशन सोसाइटी, उत्तराखंड और उत्तराखंड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट), देहरादून के सहयोग से आयोजित कार्यशाला में मंडुवा और झंगोरा सहित पारंपरिक अनाजों के मूल्य संवर्धन, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन पर जोर दिया गया। उद्देश्य स्थानीय महिलाओं और युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार से जोड़ना है।
स्थानीय उत्पादों से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
कार्यशाला में बताया गया कि उत्तराखंड के पारंपरिक मोटे अनाज पोषण के साथ प्रदेश की कृषि और सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण और आकर्षक पैकेजिंग के जरिए इन उत्पादों को बाजार की मांग के अनुरूप तैयार किया जा सकता है। इससे किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों और युवाओं के लिए आय के नए अवसर खुलेंगे।
आयोजन सचिव डा. सचि नेगी ने कहा कि स्थानीय संसाधनों पर आधारित कौशल प्रशिक्षण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पारंपरिक अनाजों को आधुनिक तकनीक और गुणवत्ता मानकों से जोड़कर व्यापक बाजार उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे महिलाएं और युवा छोटे उद्यम स्थापित कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसी कार्यशालाएं पारंपरिक कृषि ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के बीच सेतु का काम करती हैं। स्थानीय उत्पादों की पहचान बनाने और उनकी बाजार में मांग बढ़ाने के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण जरूरी है। कार्यशाला के माध्यम से क्षेत्र के पारंपरिक अनाजों को नई पहचान देने और स्थानीय समुदायों की आजीविका मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।

