
देशभर के बीज संरक्षकों ने साझा किए अनुभव, 16 किसानों के योगदान को मिली पहचान
देहरादून। योगाहार के 2000 दिन पूरे होने पर आयोजित चार दिवसीय उत्सव के दूसरे दिन ‘परम्परागत बीज नायक’ पुस्तिका का ऑनलाइन विमोचन किया गया। गूगल मीट के जरिए आयोजित कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से करीब 80 प्रतिभागी जुड़े। इस दौरान पारंपरिक बीजों के संरक्षण में जुटे किसानों के योगदान को रेखांकित करते हुए उनके अनुभव साझा किए गए।

कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण और दीप प्रज्वलन से हुआ। नैनीताल के पवन कुमार ने दो मई 2020 से शुरू हुई योगाहार की यात्रा और 2000 दिनों की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। डॉ. विनोद कुमार भट्ट ने संचालन किया, जबकि रंजना किन्हीकर ने वीडियो प्रस्तुति के माध्यम से योगाहार की यात्रा को यादगार बनाया।
सिंगापुर से एनडीडीबी के सलाहकार डॉ. ओमवीर सिंह और नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (एनबीपीजीआर) के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. कैलाश चन्द्र भट्ट ने ऑनलाइन शुभकामनाएं दीं। दोनों विशेषज्ञों ने पारंपरिक बीजों को पोषण सुरक्षा और जैव विविधता की धरोहर बताते हुए किसानों के साथ मिलकर संरक्षण के प्रयास तेज करने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में उत्तराखंड के विजय जड़धारी, हिमाचल के पद्मश्री नेकराम शर्मा, मध्य प्रदेश के रूप सिंह राजपूत, छत्तीसगढ़ के प्रह्लाद साहू, गुजरात के भारत भाई पटेल, महाराष्ट्र के रमेश साखरकर और वाराणसी के प्रकाश सिंह रघुवंशी समेत कई बीज संरक्षकों ने अपने अनुभव साझा किए।
पुस्तिका के संकलनकर्ता दिनेश चन्द्र सेमवाल ने बताया कि इसमें देशभर के 16 बीज नायकों की प्रेरक यात्राओं को स्थान दिया गया है। उन्होंने बताया कि संपादकीय मंडल में डॉ. विनोद कुमार भट्ट, पवन कुमार और रंजना किन्हीकर शामिल हैं। कार्यक्रम में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, असम, हरियाणा और दिल्ली सहित कई राज्यों के प्रतिभागियों ने भागीदारी की।
कल ‘भारतीय चिकित्सा के नायक’ पुस्तक का होगा विमोचन
चार दिवसीय उत्सव के तीसरे दिन 25 अक्टूबर को ‘भारतीय चिकित्सा के नायक’ पुस्तक का विमोचन होगा। समापन दिवस 26 अक्टूबर को ‘योगाहार और भविष्य’ विषय पर नई संभावनाओं और आगामी दिशा पर मंथन किया जाएगा।

