लक्ष्मण नेगी, ऊखीमठ। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ऊखीमठ के उच्चीकरण की मांग को लेकर तहसील परिसर में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना बुधवार को 17वें दिन भी जारी रहा। आंदोलन को अब मातृशक्ति, सामाजिक संगठनों, व्यापारियों और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों का समर्थन मिल रहा है। बुधवार को मातृशक्ति और विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों के साथ मुख्य बाजार में प्रदर्शन किया और सरकार से शीघ्र उच्चीकरण का शासनादेश जारी करने की मांग की।

आंदोलन के 17वें दिन केदारनाथ धाम के रावल भीमाशंकर लिंग ने भी मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर पीएचसी के उच्चीकरण की मांग का समर्थन किया। उन्होंने क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों के साथ स्थानीय लोगों, केदारनाथ यात्रा और सीमांत क्षेत्रों से आने वाले तीर्थयात्रियों की स्वास्थ्य जरूरतों को देखते हुए स्वास्थ्य केंद्र के उच्चीकरण को आवश्यक बताया। रावल के समर्थन से आंदोलनकारियों को नैतिक बल मिला है।
धरना स्थल पर नगर पंचायत अध्यक्ष कुब्जा धर्म्वाण ने कहा कि ऊखीमठ तहसील मुख्यालय होने के साथ ही केदारनाथ, मदमहेश्वर और तुंगनाथ जैसे महत्वपूर्ण तीर्थ क्षेत्रों का प्रवेश क्षेत्र है। इसके बावजूद यहां स्वास्थ्य सुविधाएं अपेक्षित स्तर पर विकसित नहीं हो पाई हैं। गंभीर बीमारी या दुर्घटना की स्थिति में मरीजों को बेहतर उपचार के लिए जिला चिकित्सालय अथवा श्रीनगर जाना पड़ता है।
संघर्ष समिति और व्यापार संघ अध्यक्ष राजीव भट्ट ने कहा कि पीएचसी का उच्चीकरण अब क्षेत्र की मूलभूत जरूरत बन चुका है। यात्रा सीजन में स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों की संख्या बढ़ने से स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव रहता है। ऐसे में उच्चीकृत स्वास्थ्य केंद्र से क्षेत्रवासियों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी।

मुख्य बाजार में प्रदर्शन के बाद आंदोलनकारी ढोल-नगाड़ों के साथ धरना स्थल पहुंचे। इस दौरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा गया कि मांग पर ठोस निर्णय होने तक आंदोलन जारी रहेगा। सभासद सरला रावत और प्रदीप धर्म्वाण ने कहा कि आंदोलन को मिल रहा समर्थन इसे पूरे ऊखीमठ क्षेत्र की सामूहिक मांग बना रहा है।
सुभाष अथवाल और महिला मंगल दल अध्यक्ष मिथला धर्म्वाण ने कहा कि पूर्व में दिए गए आश्वासनों के बावजूद अभी तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि सकारात्मक निर्णय नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
इस मौके पर प्रताप धर्म्वाण, भूपेन्द्र राणा, बलवन्त रावत, कर्मवीर कुंवर, दलवीर रावत, शिवचरण पंवार, बीरेन्द गोस्वामी, उर्मिला देवी, सुरमा देवी, पुष्पा देवी, सुलोचना देवी, पूनम देवी, दीपा देवी, वन्दना देवी, रूक्मणी देवी, विभा देवी, मुन्नी देवी, पूजा देवी, प्रियांशा देवी, अन्शी देवी, आरती देवी, आंचल देवी, करिश्मा देवी, कुंवरी देवी, प्रियंका देवी, बचनी देवी, बीना देवी, कैलाशी देवी, कमला देवी, गोदाम्बरी देवी, कमला देवी, ऊषा देवी, सुदामा देवी, ममता देवी, कविता देवी, गौरा देवी, अनीता देवी, बचन सिंह रावत, दौलत सिंह पंवार सहित विभिन्न गांवों के सैकड़ों आन्दोलनकारी मौजूद रहे।
