बदरीनाथ : माणा में माता मूर्ति उत्सव धूमधाम से संपन्न

Team PahadRaftar

माणा में माता मूर्ति उत्सव धूमधाम से संपन्न

वामन द्वादशी पर भगवान बदरीविशाल के प्रतिनिधि के रूप में माता मूर्ति के पास पहुंचे उद्धव जी, पांच हजार से अधिक श्रद्धालु बने साक्षी

संजय कुंवर, माणा। भू-बैकुंठ नगरी माणा में बुधवार को वामन द्वादशी के अवसर पर माता मूर्ति देव उत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। भगवान बदरीविशाल की पवित्र गद्दी और उनके प्रतिनिधि भगवान उद्धव जी की डोली माता मूर्ति मंदिर पहुंची। यहां सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा के अनुसार माता मूर्ति और भगवान नारायण के पवित्र संबंध का स्मरण किया गया। उत्सव के साक्षी बनने के लिए पांच हजार से अधिक श्रद्धालु माणा पहुंचे।

उद्धव जी भगवान के प्रतिनिधि

धार्मिक मान्यता के अनुसार माता मूर्ति को भगवान नर-नारायण की माता माना जाता है। माता मूर्ति उत्सव में भगवान उद्धव जी की विशेष भूमिका है। उन्हें भगवान बदरीविशाल का प्रतिनिधि माना जाता है। इसी परंपरा के तहत भगवान बदरीविशाल की ओर से उद्धव जी की डोली माता मूर्ति मंदिर पहुंचती है। वहां पूजा-अर्चना के बाद उद्धव जी के माध्यम से भगवान की कुशलक्षेम माता मूर्ति तक पहुंचाने की धार्मिक परंपरा निभाई जाती है। इसीलिए उत्सव को माता और भगवान के पवित्र संबंध के स्मरण तथा प्रतीकात्मक मिलन के पर्व के रूप में देखा जाता है।

मंगलवार शाम माणा गांव से श्री घंटाकर्ण घन्याल महाराज बदरीनाथ मंदिर पहुंचे और भगवान बदरीविशाल को माता मूर्ति उत्सव का निमंत्रण दिया। बुधवार सुबह प्रात:कालीन भोग के बाद ठीक 10 बजे भगवान बदरीविशाल की पवित्र गद्दी और भगवान उद्धव जी की डोली गाजे-बाजे के साथ सिंहद्वार से माता मूर्ति मंदिर के लिए रवाना हुई।

आईटीबीपी कैंप से आगे माणा गांव की महिलाओं और पुरुषों ने पारंपरिक वेशभूषा में देव डोली का स्वागत किया। ग्रामीणों ने माता मूर्ति उत्सव के लिए उगाई गई पवित्र जौ की हरियाली भेंट की। माता मूर्ति मंदिर पहुंचने पर हरियाली अर्पित की गई, जिसे प्रसाद स्वरूप श्रद्धालुओं को वितरित किया गया।

माता मूर्ति मंदिर परिसर में रावल, धर्माधिकारी, पुजारियों और स्थानीय हक-हकूकधारियों ने पूजा-अर्चना कराई। इसके बाद भगवान उद्धव जी की डोली को माता मूर्ति के समक्ष ले जाया गया। धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान की कुशलक्षेम बताई गई और अगले वामन द्वादशी पर फिर आने का संकल्प दोहराया गया। इस धार्मिक दृश्य के दौरान श्रद्धालु भावुक नजर आए।

3:15 बजे खुले बदरीनाथ मंदिर के कपाट

माता मूर्ति उत्सव के चलते सुबह 10 बजे से बदरीनाथ मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद रहे। दिन का भोग-प्रसाद ग्रहण करने के बाद करीब तीन बजे भगवान उद्धव जी की डोली और भगवान बदरीविशाल की गद्दी वापस बदरीनाथ मंदिर पहुंची। इसके बाद शाम 3:15 बजे मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए गए।

बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती ने कहा कि माता मूर्ति उत्सव लोक मान्यता, परंपरा, धर्म और आस्था का प्रतीक है। सदियों से चली आ रही इन परंपराओं का निर्वहन बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की ओर से पूरी श्रद्धा के साथ किया जा रहा है।

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