गिरीश चंदोला चमोली। डिजिटल इंडिया के दौर में मोबाइल और इंटरनेट लोगों की जरूरत बन चुके हैं, लेकिन चमोली जिले के दूरस्थ सुतोल गांव के ग्रामीण आज भी मोबाइल नेटवर्क की सुविधा का इंतजार कर रहे हैं। गांव में नेटवर्क नहीं होने के कारण ग्रामीणों को जरूरी फोन करने के लिए दूसरे स्थानों का रुख करना पड़ता है। इससे आम दिनों के साथ ही आपात स्थिति में भी परेशानी उठानी पड़ती है।
मोबाइल नेटवर्क के अभाव में ग्रामीण अपने सगे-संबंधियों से संपर्क करने के साथ ही विभागीय अधिकारियों तक शिकायत और जरूरी सूचना पहुंचाने में भी असहाय नजर आते हैं। किसी व्यक्ति के बीमार होने या अन्य आपात स्थिति में तत्काल संपर्क करना भी चुनौती बन जाता है।
बैंकिंग और ऑनलाइन सेवाओं में भी परेशानी
वर्तमान समय में बैंकिंग, ऑनलाइन सरकारी सेवाओं, शिक्षा, रोजगार और विभिन्न योजनाओं से जुड़े कार्य मोबाइल इंटरनेट के माध्यम से हो रहे हैं। ऐसे में नेटवर्क सुविधा नहीं होने से ग्रामीणों को इन सेवाओं का लाभ लेने के लिए भी दूसरे स्थानों पर निर्भर रहना पड़ता है।
नेटवर्क के लिए तय करनी पड़ती है दूरी
ग्रामीणों के मुताबिक गांव में नेटवर्क नहीं आने के कारण उन्हें फोन करने के लिए कई बार पैदल चलकर ऐसे स्थानों पर जाना पड़ता है, जहां मोबाइल सिग्नल मिल सके। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच यह समस्या ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है।
दावों पर सवाल
सरकार की ओर से अंतिम छोर तक मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन सुतोल जैसे दूरस्थ गांवों में अब भी ग्रामीण संचार सुविधा की राह देख रहे हैं। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से गांव में मोबाइल टावर स्थापित कर स्थायी नेटवर्क सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है।
