चमोली : फूलों की खुशबू से आत्मनिर्भरता की राह तलाश रहीं जोशीमठ की महिलाएं

Team PahadRaftar

फूलों की खुशबू से आत्मनिर्भरता की राह तलाश रहीं जोशीमठ की महिलाएं

प्रशिक्षण से कारोबार तक की तैयारी, 56 महिलाओं को पहले चरण में मिले फूलों की खेती के पैकेट

संजय कुंवर | जोशीमठ

हिमालयी क्षेत्र में खेती के पारंपरिक तौर-तरीकों के बीच अब फूलों की खेती महिलाओं के लिए स्वरोजगार का नया रास्ता बन सकती है। सीमांत नगर जोशीमठ में महिलाओं को फूलों की व्यावसायिक खेती से जोड़ने की पहल शुरू हुई है। उद्देश्य सिर्फ खेतों में फूल उगाना नहीं, बल्कि स्थानीय संसाधनों के जरिए महिलाओं के लिए आय का स्थायी साधन तैयार करना है।

इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए ऋषि प्रसाद सती ने जिलाधिकारी से वार्ता कर जोशीमठ की महिलाओं को फूलों की खेती का प्रशिक्षण उपलब्ध कराने का विषय रखा। इसके बाद जिला उद्यान विभाग के अधिकारियों के साथ समन्वय किया गया और महिलाओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कराया गया।

खेती से बाजार तक की समझ

प्रशिक्षण में महिलाओं को फूलों की खेती की तकनीक के साथ पौधों की देखभाल, उत्पादन, गुणवत्ता और विपणन की जानकारी दी गई। जोर इस बात पर रहा कि फूलों की खेती को केवल घरेलू जरूरत तक सीमित न रखकर इसे आय के स्रोत के रूप में विकसित किया जाए।

नगर पालिका क्षेत्र के फेडरेशन समूह से करीब 400 महिलाएं जुड़ी हैं। करीब 40 स्वयं सहायता समूह इसके तहत काम कर रहे हैं। फेडरेशन की अध्यक्ष अनीता पवार और सचिव सुमेधा भट्ट के समन्वय से महिलाओं को पहल से जोड़ने और सामग्री वितरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।

पहले कदम में 56 पैकेट

प्रशिक्षण के बाद अब महिलाओं को फूलों की खेती के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। पहले चरण में 56 पैकेट वितरित किए गए हैं। आगे अन्य स्वयं सहायता समूहों को भी चरणबद्ध तरीके से इसका लाभ दिया जाएगा।

ऋषि प्रसाद सती के मुताबिक महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केवल प्रशिक्षण पर्याप्त नहीं है, बल्कि खेती के लिए जरूरी संसाधन भी उपलब्ध कराने होंगे। उनका कहना है कि फूलों की खेती के जरिए महिलाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार और आय का अवसर मिले, यही इस पहल का उद्देश्य है।

जोशीमठ जैसे सीमांत क्षेत्र में फूलों की खेती का यह प्रयोग यदि उत्पादन के साथ बाजार से भी जुड़ता है तो महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा मिल सकती है। फिलहाल प्रशिक्षण और सामग्री वितरण के जरिए इसकी पहली जमीन तैयार हो चुकी है।

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