ऊखीमठ : सतढुंग महादेव मन्दिर हाट में 11 दिवसीय शिव महापुराण शुरू

Team PahadRaftar

एकात्म निकेतन सतढुंग महादेव मन्दिर हाट का वातावरण बना भक्तिमय। 11 दिवसीय शिव महापुराण एवं रूद्र महायज्ञ का भव्य आयोजन। शिव महिमा के गुणगान से गुंजायमान हुआ समूचा क्षेत्र.

लक्ष्मण नेगी 

ऊखीमठ। केदार घाटी के पावन धाम सतढुंग महादेव मन्दिर, हाट स्थित एकात्म निकेतन परिसर में आयोजित 11 दिवसीय शिव महापुराण कथा एवं रूद्र महायज्ञ के आयोजन से क्षेत्र का वातावरण भक्तिमय बना हुआ है । दूर-दराज के गांवों से बड़ी संख्या में प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु कथा श्रवण एवं यज्ञ में आहुति देकर पुण्य अर्जित कर रहे हैं। शिव महापुराण कथा व रुद्र महायज्ञ में प्रतिदिन गणेश पूजन, पंचांग पूजन, नवग्रह पूजन के साथ ही हवन कुंड में साढ़े बारह हजार आहूतियां डालकर विश्व समृद्धि व क्षेत्र के खुशहाली की कामना की जा रही है । विद्वान आचार्यों की वेद ऋचाओं , महिलाओं के धार्मिक भजनों व भक्तों की जयकारों से सम्पूर्ण केदार घाटी का पग – पग भक्तिमय बना हुआ है।

शिव महापुराण कथा के आठवें दिन ब्यास पीठ पर विराजमान कथावाचक आचार्य दिनेश चन्द्र भट्ट ने कहा कि शिव महापुराण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करने का दिव्य साधन है। उन्होंने कथा के दौरान भगवान शिव के करुणामय, भोले और कल्याणकारी स्वरूप का भावपूर्ण चित्रण करते हुए कहा कि भगवान शिव संहार के देवता होते हुए भी सृष्टि के संतुलन और संरक्षण के प्रतीक हैं। वे ही आदि योगी, आदिगुरु और त्रिलोकीनाथ हैं। समुद्र मंथन के समय विषपान कर ‘नीलकंठ’ बने शिव मानवता के लिए त्याग और समर्पण की सर्वोच्च मिसाल हैं। रूद्र महायज्ञ के अंतर्गत प्रतिदिन विशेष आहुतियां अर्पित की जा रही हैं, जिससे वातावरण शुद्ध एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हो रहा है। यज्ञाचार्यों के अनुसार रूद्राभिषेक और महायज्ञ से समस्त लोककल्याण, वर्षा की संतुलित व्यवस्था, रोग-शोक से मुक्ति तथा समाज में शांति और सद्भाव की स्थापना होती है।

शिव महापुराण कथा में शामिल शिव भक्तों का कहना है कि केदार घाटी जैसे आध्यात्मिक क्षेत्र में आयोजित यह महायज्ञ विशेष फलदायी है। हिमालय की गोद में बसे इस क्षेत्र का शिव से विशेष संबंध रहा है। समीप स्थित केदारनाथ धाम की दिव्यता और तपोभूमि की पावनता यहां के धार्मिक आयोजनों को और अधिक प्रभावशाली बनाती है।

सामाजिक कार्यकर्ता अनिल जिरवाण ने बताया कि प्रतिदिन प्रातः रूद्राभिषेक, दोपहर में शिव महापुराण कथा और सायंकाल भजन-कीर्तन व महाआरती का आयोजन से पूरी केदार घाटी इन दिनों शिवमय हो उठी है। भक्ति, श्रद्धा और वैदिक परम्परा के इस संगम ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया है। उनका कहना है कि ऐसे आयोजन न केवल धार्मिक चेतना को जागृत करते हैं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को भी सुदृढ़ बनाते हैं। बताया कि हर-हर महादेव के जयघोष के साथ शिव महापुराण एवं रूद्र महायज्ञ निरंतर प्रगति पर है और श्रद्धालु भावविभोर होकर भगवान शिव की कृपा प्राप्त कर रहे हैं।

शिव महापुराण कथा में प्रतिदिन आचार्य विजय बेजवाल द्वारा पुराण पारायण किया जा रहा है जबकि आचार्य कैलाश नौटियाल, प्रियधर पुरोहित, हिमांशु नौटियाल, सुनील गौड़, त्रिलोचन प्रसाद भट्ट द्वारा रूद्र महायज्ञ में सहभागिता की जा रही है। शिव महापुराण कथा में प्रधान हाट श्रीमती संजू गोस्वामी, समिति अध्यक्ष रामचन्द्र गोस्वामी, उपाध्यक्ष भूपेंद्र नेगी, मंत्री विजय बेजवाल, सचिव बुद्धि बल्लभ गोस्वामी, कोषाध्यक्ष मुरारी प्रसाद गोस्वामी, बिक्रम राणा , शिशुपाल रावत, ओम गोस्वामी सहित समस्त क्षेत्रवासियों द्वारा विशेष सहयोग किया जा रहा है।

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