
कौशलम कार्यशाला में शिक्षकों ने सीखे विद्यार्थियों में उद्यमशील सोच विकसित करने के गुर
केएस असवाल गौचर। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) गौचर में 10 से 12 सितंबर तक कौशलम पाठ्यचर्या की तीन दिवसीय अभिमुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में चमोली जिले के राजकीय विद्यालयों से 150 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इसमें विद्यार्थियों में 21वीं सदी के कौशल विकसित करने के साथ ही उन्हें करियर और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए तैयार करने पर जोर दिया गया।
कार्यशाला में बताया गया कि कौशलम कार्यक्रम के तहत कक्षा नौ के विद्यार्थियों से समस्या समाधान आधारित परियोजना तैयार कराई जा रही है। कक्षा 10 में करियर एक्सप्लोरेशन, कक्षा 11 में आइडिया प्रोटोटाइप और कक्षा 12 में रुचि आधारित परियोजनाओं पर कार्य कराया जा रहा है। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी रुचि और क्षमता पहचानने का अवसर दिया जा रहा है।
प्रशिक्षण के दौरान उद्यमशील मानसिकता, दृढ़ता, स्वतंत्र सोच, स्वजागरूकता और नई चीजों को आजमाने की प्रवृत्ति विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। इसके साथ ही सहकार्यता, संवाद कौशल, तार्किक चिंतन और रचनात्मकता जैसे 21वीं सदी के कौशलों को गतिविधियों के माध्यम से समझाया गया। प्रतिभागियों ने विभिन्न गतिविधियों का अभ्यास किया और इन्हें विद्यालयों में विद्यार्थियों के साथ कराने के तौर-तरीके सीखे।
कार्यशाला में संदर्भदाता के रूप में रंजीत सिंह रावत, वीरेंद्र सिंह नेगी, पुष्पा कनवासी, राजेंद्र सिंह कंडारी, मनोज हटवाल, ललित मोहन पांडे और उद्यम लर्निंग से तेजेंद्र रावत ने प्रशिक्षण दिया। कार्यक्रम समन्वयक सुबोध कुमार डिमरी और डायट के संकाय सदस्यों ने कार्यशाला के संचालन में सहयोग किया।
समापन अवसर पर डायट प्राचार्य आकाश सारस्वत ने प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने कार्यशाला में सीखी गई गतिविधियों को विद्यालयों में प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया।
