
थराली, गिरीश चंदोला संवाददाता। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) थराली के समीप बड़ी मात्रा में जली हुई सरकारी दवाइयां मिलने से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, अस्पताल के निकट जली हुई दवाइयों के अवशेष मिले हैं। दवाइयों के पैकेटों पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की आपूर्ति संबंधी विवरण भी अंकित है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि इन दवाइयों को किसके निर्देश पर और किन परिस्थितियों में नष्ट किया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि दवाइयां एक्सपायर हो चुकी थीं तो उनका निस्तारण निर्धारित बायोमेडिकल वेस्ट नियमों के तहत किया जाना चाहिए था। वहीं यदि उपयोग योग्य दवाओं को जलाया गया है तो यह गंभीर लापरवाही और सरकारी संसाधनों की बर्बादी का मामला हो सकता है।
प्रदेश सरकार सरकारी अस्पतालों में मरीजों को निशुल्क दवाइयां उपलब्ध कराने का दावा करती है। ऐसे में सरकारी दवाइयों का इस तरह जला हुआ मिलना दवा प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी सीएचसी थराली विभिन्न मामलों को लेकर चर्चाओं में रहा है। अस्पताल में गैर-चिकित्सकीय कर्मचारियों द्वारा आपातकालीन मरीजों को देखने के आरोप भी लग चुके हैं।
क्या बोले सीएमओ
मुख्य चिकित्सा अधिकारी चमोली डॉ. अभिषेक गुप्ता ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है और इसकी जांच कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि एक्सपायरी अवधि के अंतिम चरण में दवाओं की प्रभावशीलता कम हो सकती है, लेकिन उनका निस्तारण बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन नियमों के तहत किया जाना चाहिए था। दवाइयों को जलाना निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जली हुई दवाइयां एक्सपायर थीं या नहीं तथा उनके निस्तारण में कहीं नियमों की अनदेखी तो नहीं की गई। स्थानीय लोग मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं।
