लक्ष्मण नेगी संवाददाता, ऊखीमठ : आरटीई अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त करने और पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने की मांग को लेकर प्राथमिक शिक्षकों का आंदोलन तेज हो गया है। चरणबद्ध आंदोलन के तहत उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ की रुद्रप्रयाग इकाई ने केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों के समर्थन में पहल करने का अनुरोध किया।
अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के आह्वान पर चल रहे राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तहत शिक्षकों ने कहा कि वर्ष 2010 में आरटीई अधिनियम लागू होने के बाद अध्यापक पात्रता परीक्षा (टीईटी) का प्रावधान नई नियुक्तियों के लिए किया गया था। दशकों से सेवा दे रहे शिक्षकों को सेवा में बने रहने और पदोन्नति के लिए टीईटी देने को बाध्य करना न्यायसंगत नहीं है।
जिला प्राथमिक शिक्षक संघ रुद्रप्रयाग के अध्यक्ष विक्रम सिंह झिंक्वाण ने कहा कि सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित योग्यता मानकों के आधार पर शिक्षकों की नियुक्तियां की गई हैं। ऐसे में वर्षों से कार्यरत शिक्षकों पर बाद में बनाए गए नियम लागू करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी भी अन्य सरकारी सेवा में पदोन्नति या सेवा जारी रखने के लिए पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता नहीं है, फिर शिक्षकों के साथ अलग व्यवहार क्यों किया जा रहा है।
केंद्र सरकार से संशोधन की मांग
ज्ञापन के माध्यम से विधायक से अनुरोध किया गया कि वह केंद्रीय शिक्षा मंत्री को पत्र भेजकर आरटीई अधिनियम 2010 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को टीईटी से मुक्त रखने के लिए अधिनियम में आवश्यक संशोधन कराने की मांग करें।
पुरानी पेंशन बहाली की उठी आवाज
शिक्षकों ने अक्टूबर 2005 के बाद नियुक्त शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि नई पेंशन योजना कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित नहीं करती, जबकि पुरानी पेंशन व्यवस्था सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करती है। उन्होंने प्रदेशभर में 2005 से पूर्व की विज्ञप्तियों के आधार पर नियुक्त शिक्षकों को पुरानी पेंशन का लाभ देने की मांग की।
आंदोलन होगा और तेज
शिक्षक नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक टीईटी अनिवार्यता संबंधी प्रावधान वापस नहीं लिया जाता और पुरानी पेंशन बहाल नहीं की जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। ज्ञापन सौंपने वालों में विक्रम सिंह झिंक्वाण, दिनेश चंद्र भट्ट, रधुबीर बुटोला, कैलाश मैठाणी, राजेंद्र लाल शाह, देवेंद्र वजवाल और दीर्घायु प्रसाद समेत अन्य शिक्षक शामिल रहे।
