जोशीमठ : संस्कृत को आधुनिक संदर्भों से जोड़ने पर जोर, ई-संगोष्ठी में विद्वानों ने साझा किए विचार

Team PahadRaftar

संजय कुंवर जोशीमठ। उत्तराखंड संस्कृत अकादमी एवं राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय जोशीमठ के संयुक्त तत्वावधान में ‘संस्कृत की उपयोगिता एवं प्रासंगिकता’ विषय पर ऑनलाइन ई-संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें चमोली जनपद सहित विभिन्न क्षेत्रों से 50 से अधिक विद्वानों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं संस्कृत प्रेमियों ने ऑनलाइन प्रतिभाग किया।

मुख्य अतिथि जोधपुर विश्वविद्यालय के प्रो. सत्यप्रकाश द्विवेदी ने कहा कि संस्कृत केवल प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा की भाषा नहीं, बल्कि इसके साहित्य, दर्शन, विज्ञान, संस्कृति और जीवन-मूल्य आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने संस्कृत को आधुनिक शिक्षा और तकनीकी माध्यमों से जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया।

विशिष्ट अतिथि संस्कृत शिक्षा विभाग के सहायक निदेशक मनसा राम मैदुली ने कहा कि संस्कृत को केवल धार्मिक भाषा तक सीमित रखने के बजाय भारतीय ज्ञान, चिंतन और संस्कृति की समृद्ध परंपरा के रूप में समझने की आवश्यकता है। उन्होंने भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता बताई।

मुख्य वक्ता उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के साहित्य विभाग की डॉ. कंचन तिवारी ने संस्कृत साहित्य की समृद्ध परंपरा और वर्तमान उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संस्कृत साहित्य में मानव जीवन, समाज, प्रकृति, नैतिकता और ज्ञान से जुड़ा व्यापक चिंतन उपलब्ध है, जिसे वर्तमान सामाजिक एवं शैक्षिक संदर्भों में उपयोगी बनाया जा सकता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. पंकज कुमार ने की। उन्होंने संस्कृत को भारतीय ज्ञान परंपरा की आधारशिला बताते हुए कहा कि इसके संरक्षण और संवर्धन की जिम्मेदारी केवल विद्वानों तक सीमित नहीं है। समाज के प्रत्येक वर्ग को इसमें अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

ई-संगोष्ठी में संस्कृत की शैक्षिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक उपयोगिता पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने युवाओं में संस्कृत के प्रति रुचि बढ़ाने तथा डिजिटल माध्यमों के जरिए इसके प्रचार-प्रसार को गति देने पर विशेष जोर दिया।

उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के सचिव प्रो. विद्याविनय अलंकार एवं शोध अधिकारी डॉ. हरीश गुरुरानी के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने संस्कृत की वर्तमान स्थिति, संभावनाओं और भविष्य की दिशा पर सार्थक विचार-विमर्श किया। आयोजकों ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

Leave a Reply

You May Like